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डिग्री पूरी होने से पहले पूरी होगी नौकरी की तलाश! फाइनल ईयर स्टूडेंट्स को कैसे मिल सकते हैं ‘करियर अवसर?’

PM Internship Scheme: अगर आप भी कॉलेज फाइनल ईयर में हैं और अब आपको नौकरी की चिंता सता रही है, तो पीएम इंटर्नशिप योजना (PM Internship Scheme) का उठा सकते हैं लाभ, जॉब की गारंटी तो नहीं, लेकिन करियर की सही राह जरूर दिखा देगी ये सरकारी स्कीम...
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 17, 2026

PM Internship Yojana for final year students job career opportunity

PM Internship Yojana for final year students job career opportunity: जानिए क्या है ये योजना कैसे दे रही करियर के अवसर? (photo: AI creative)

PM Internship Scheme: कॉलेज के अंतिम वर्ष में पहुंचते ही ज्यादातर युवाओं के सामने एक ही चिंता होती है, डिग्री पूरी होने के बाद नौकरी कहां मिलेगी? लेकिन अब सरकार ने इस चिंता को थोड़ा पहले हल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके तहत प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PM Internship Yojana) के पायलट चरण में अब स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को भी शामिल किया गया है।

यानी छात्र डिग्री पूरी होने का इंतजार किए बिना ही कंपनियों में वास्तविक काम का अनुभव हासिल कर सकते हैं। सरकार का उद्देश्य पढ़ाई और रोजगार के बीच की दूरी कम करना है। अप्रैल 2026 में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने पात्रता का विस्तार करते हुए अंतिम वर्ष के स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को योजना में शामिल करने की जानकारी दी।

अब कॉलेज के आखिरी साल में ही उद्योग से जुड़ने का मौका

अभी तक पढ़ाई और नौकरी के बीच एक बड़ा अंतर दिखाई देता है। छात्र वर्षों तक किताबों और परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन जब नौकरी के लिए जाते हैं तो कंपनियां उनसे अनुभव और व्यावहारिक कौशल की उम्मीद करती हैं। यही अंतर प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के जरिए कम करने की कोशिश है।

नई व्यवस्था में अंतिम वर्ष के विद्यार्थी पढ़ाई के साथ ही कंपनियों में काम का वास्तविक अनुभव हासिल कर सकते हैं। इसके लिए उनके शैक्षणिक संस्थान से अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी यह पुष्टि जरूरी होगी कि इंटर्नशिप में भाग लेने से उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। यह प्रमाणपत्र विभागाध्यक्ष, डीन, प्राचार्य या प्रशिक्षण एवं नियुक्ति अधिकारी जैसे अधिकृत अधिकारी दे सकते हैं।

इसका मतलब साफ है कि, अब इंटर्नशिप को सिर्फ अतिरिक्त गतिविधि के रूप में देखने के बजाय उसे पढ़ाई से रोजगार तक जाने वाली सीढ़ी के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश हो रही है।

युवाओं के लिए असली फायदा क्या होगा?

किसी कंपनी में काम करने का अनुभव केवल प्रमाणपत्र से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है। कॉलेज में पढ़ने वाला स्टूडेंट्स किसी विषय को किताबों में समझ सकता है, लेकिन कंपनी में काम करते हुए उसे पता चलता है कि वास्तविक दुनिया में किसी समस्या को कैसे हल किया जाता है, समय सीमा में काम कैसे पूरा होता है, टीम के साथ कैसे काम करना होता है और ग्राहक या वरिष्ठ अधिकारी की जरूरत को कैसे समझा जाता है।

यही वजह है कि सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उस लक्ष्य से इसे जोड़ रही है, जिसमें व्यावहारिक शिक्षा, उद्योग से जुड़ाव और विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

हर इंटर्नशिप नौकरी नहीं देगी, लेकिन रास्ता जरूर खोल सकती है

यहां स्टूडेंट्स को सबसे जरूरी बात समझनी होगी। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना को नौकरी की गारंटी नहीं समझना चाहिए। इंटर्नशिप का मुख्य उद्देश्य उद्योग का अनुभव और रोजगार के लिए जरूरी कौशल विकसित करना है।

हालांकि वास्तविक काम का अनुभव आगे नौकरी तलाशते समय विद्यार्थी की स्थिति मजबूत कर सकता है। उसके पास केवल डिग्री नहीं होगी, बल्कि यह बताने के लिए अनुभव भी होगा कि उसने किसी संगठन में किस तरह का काम किया है। यही बदलाव उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जो डिग्री पूरी करने के बाद पहली नौकरी के लिए आवेदन करते समय अनुभव की कमी से जूझते हैं।

योजना में कितने अवसर हैं?

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना की शुरुआत अक्टूबर 2024 में हुई थी। इसका बड़ा लक्ष्य अगले पांच वर्षों में देश की बड़ी कंपनियों में एक करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराना है।

2026 में सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक मई 2026 तक योजना में 63 हजार से ज्यादा इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध थे। ये अवसर 25 से अधिक क्षेत्रों और 730 से ज्यादा जिलों में उपलब्ध बताए गए हैं। योजना के तहत चयनित इंटर्न को सरकार और कंपनी के योगदान से हर महीने करीब 9,000 रुपए की आर्थिक सहायता और एक बार 6,000 रुपए की आकस्मिक सहायता का प्रावधान बताया गया है। इससे योजना का दायरा केवल बड़े महानगरों तक सीमित रखने के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने की कोशिश दिखाई देती है।

अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए क्यों बड़ा बदलाव?

पहले विद्यार्थी अक्सर यह सोचकर इंटर्नशिप टाल देते थे कि पहले पढ़ाई पूरी कर लें, उसके बाद नौकरी की तैयारी करेंगे। अब तस्वीर बदल सकती है। अंतिम वर्ष में पढ़ाई के साथ उद्योग का अनुभव लेने से विद्यार्थी को डिग्री पूरी होने से पहले ही यह समझने का मौका मिलेगा कि उसे किस क्षेत्र में आगे बढ़ना है।

मसलन कोई विद्यार्थी वित्त की पढ़ाई कर रहा है, लेकिन इंटर्नशिप के दौरान उसे आंकड़ों के विश्लेषण में अधिक रुचि मिलती है। दूसरा विद्यार्थी विपणन पढ़ रहा है लेकिन कंपनी में काम करके उसे बिक्री और ग्राहक व्यवहार का क्षेत्र बेहतर लग सकता है। यानी इंटर्नशिप केवल अनुभव नहीं देगी, बल्कि करियर की दिशा तय करने में भी मदद कर सकती है।

लेकिन सबसे बड़ी चुनौती भी यहीं है

इंटर्नशिप की संख्या बढ़ना अपने आप में पर्याप्त नहीं होगा। असली सवाल उसकी गुणवत्ता का होगा। स्टूडेंट्स को केवल नाम के लिए प्रमाणपत्र मिला या उन्होंने वास्तव में कंपनी के काम को समझा यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।

इसी तरह ग्रामीण और छोटे शहरों के स्टूडेंट्स की भागीदारी भी इस योजना की सफलता का बड़ा पैमाना होगी। यदि अच्छे अवसर केवल बड़े शहरों या चुनिंदा संस्थानों तक सीमित रहे तो योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।

सरकार ने योजना में 300 से ज्यादा कंपनियों की भागीदारी का उल्लेख किया है और तीसरे दौर में कंपनियों की ओर से लगातार इंटर्नशिप अवसर पोस्ट किए जा रहे थे।

कौन आवेदन कर सकता है?

स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष के विद्यार्थी अब आवेदन कर सकते हैं। आयु 18 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए और योजना की बाकी पात्रता शर्तें भी पूरी करनी होंगी।

सबसे जरूरी दस्तावेज क्या है?

अंतिम वर्ष के छात्र को अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) देना होगा। इसमें संस्थान को यह प्रमाणित करना होगा कि इंटर्नशिप करने से विद्यार्थी की पढ़ाई या शैक्षणिक आवश्यकताओं पर असर नहीं पड़ेगा। एनओसी पर विभागाध्यक्ष, डीन, प्राचार्य या प्रशिक्षण एवं नियुक्ति अधिकारी जैसे अधिकृत अधिकारी हस्ताक्षर कर सकते हैं।

आवेदन कहां करना है?

इस आवेदन का लाभ लेने के लिए स्टूडेंट्स को प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन करना होगा।

कैसे आवेदन करें?

  • आधिकारिक पीएम इंटर्नशिप पोर्टल पर पंजीकरण करें।
  • अपनी शैक्षणिक और व्यक्तिगत जानकारी भरें।
  • अपनी रुचि के अनुसार उपलब्ध इंटर्नशिप देखें।
  • क्षेत्र, भूमिका और स्थान के आधार पर उपयुक्त अवसर चुनें।
  • अंतिम वर्ष के विद्यार्थी अपना एनओसी तैयार रखें और आवेदन प्रक्रिया में जमा करें।
  • आवेदन के बाद कंपनी की ओर से चयन प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करें।
  • योजना के पोर्टल पर विद्यार्थी अपनी रुचि और करियर लक्ष्य के अनुसार अवसर खोज सकते हैं।
  • 2026 में पायलट चरण के तीसरे दौर में कंपनियां लगातार नए अवसर पोस्ट कर रही हैं।

कितना पैसा मिलेगा?

  • चयनित इंटर्न को कम से कम 9,000 प्रतिमाह की वित्तीय सहायता का प्रावधान है। इसके अलावा योजना में एकमुश्त 6,000 आकस्मिक सहायता का भी प्रावधान बताया गया है।
  • कहां-कहां अवसर मिल सकते हैं?

सरकारी रिकॉर्ड्स बताते हैं कि योजना में 300 से अधिक कंपनियां भाग ले चुकी हैं और अवसर अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध हैं। मई 2026 तक 25 से ज्यादा क्षेत्रों और 730 से ज्यादा जिलों में 63 हजार से अधिक इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध होने की जानकारी दी गई थी।

युवाओं के लिए संदेश, अंतिम साल को हल्के में न लें

अब कॉलेज का अंतिम वर्ष केवल परीक्षा और डिग्री लेने का समय नहीं रह गया है। यदि स्टूडेंट्स को उपयुक्त इंटर्नशिप मिलती है तो, वह इसी दौरान अपने क्षेत्र को परख सकता है, कौशल विकसित कर सकता है और काम की दुनिया को करीब से समझ सकता है। हालांकि हर विद्यार्थी को अपनी पढ़ाई, संस्थान के नियम और इंटर्नशिप की वास्तविक भूमिका देखकर फैसला करना चाहिए।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में लास्ट ईयर स्टूडेंट्स को शामिल करने का फैसला एक बड़े बदलाव की ओर संकेत करता है। नौकरी की तैयारी अब डिग्री मिलने के बाद नहीं, डिग्री पूरी होने से पहले ही शुरू करने की कोशिश की जा रही है।

आने वाले समय में इस पहल की असली सफलता इस बात से तय होगी कि कितने स्टूडेंट्स इंटर्नशिप के बाद बेहतर कौशल, बेहतर करियर दिशा और वास्तविक रोजगार के अवसर तक पहुंच पाते हैं।