
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान के साथ हवाई संपर्क लगभग पूरी तरह टूटने के बाद इराक सरकार ने शनिवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा कि वह कुछ हवाईअड्डों को छूट दिलाने के लिए वाशिंगटन से सीधी बातचीत कर रही है, ताकि ईरान के साथ उड़ानें फिर शुरू हो सकें। इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के मीडिया कार्यालय ने कहा कि यह मांग मेडिकल इलाज, शिक्षा, धार्मिक यात्राओं और आम नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए की गई है। सरकारी बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि इराक क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है, साथ ही आगाह किया गया कि लंबे समय तक चलने वाला संकट स्थिति को और जटिल बना सकता है। सभी पक्षों से बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील भी की गई।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने सितंबर की शुरुआत में ईरान के एविएशन सेक्टर को निशाना बनाते हुए नए प्रतिबंधों की घोषणा की थी, जो लगभग 30 कंपनियों, संस्थाओं और व्यक्तियों को कवर करते हैं। इसके तहत उन मंजूरियों को रद्द कर दिया गया जिनके तहत गैर-अमेरिकी एयरलाइंस को अमेरिकी मूल या नियंत्रण वाले कमर्शियल विमान ईरान ले जाने की अनुमति थी। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को कहा था कि ईरानी एयरलाइंस "बंद" हो जाएंगी। इसके बाद इराक सहित संयुक्त अरब अमीरात जैसे कई क्षेत्रीय देशों ने इस प्रतिबंध को लागू करना शुरू कर दिया।
AFP की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को पहले इरबिल और सुलेमानिया (इराकी कुर्दिस्तान), फिर नजफ और अंत में बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने ईरान से आने-जाने वाली सभी उड़ानें रोक दीं। नजफ एयरपोर्ट के निदेशक हुसैन मुहन्ना ने एएफपी को बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर स्थानीय समयानुसार सुबह 2 बजे से यह रोक लागू हुई। नजफ हवाईअड्डा शिया मुसलमानों के लिए तीर्थयात्रा का एक प्रमुख केंद्र है। यहां से हर साल बड़ी संख्या में इराकी शिया श्रद्धालु ईरान के पवित्र शहरों और ईरानी श्रद्धालु इराक के पवित्र स्थलों की यात्रा करते हैं।
वहीं, अन्य रिपोर्ट के अनुसार, इन उड़ानों से इलाज के लिए ईरान जाने वाले मरीज और वहां पढ़ने वाले इराकी छात्र भी प्रभावित हुए हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए तीन साल से डायलिसिस पर निर्भर एक मरीज की ईरान यात्रा भी इस रोक के कारण अधर में लटक गई है, क्योंकि सड़क मार्ग से यात्रा उसके लिए संभव नहीं है। हालांकि जमीनी रास्ते अभी भी खुले हैं, लेकिन इनसे यात्रा महंगी और लंबी हो गई है।
इस बीच इराकी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, सरकार ने गुरुवार को बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अमेरिकी दूतावास के डिप्लोमैटिक सपोर्ट सेंटर का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के लिए आधिकारिक तौर पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस पर इराक के उप विदेश मंत्री मोहम्मद हुसैन बहर अल-उलूम और इराक में अमेरिकी दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स स्टीवन फैगिन ने हस्ताक्षर किए।
यह कदम इराक सरकार के उस प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत 30 सितंबर की तय समय-सीमा तक अमेरिकी नेतृत्व वाले इंटरनेशनल गठबंधन और विदेशी सेना की मौजूदगी खत्म करने की प्रक्रिया पूरी की जानी है। बहर अल-उलूम ने इसे द्विपक्षीय संबंधों को आर्थिक, विकास और ऊर्जा क्षेत्रों में साझेदारी के नए दौर में ले जाने के लिए अहम बताया। गौरतलब है कि इस साल 28 फरवरी को ईरान पर इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद से क्षेत्र में तनाव बना हुआ है, और इराक में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर भी इस दौरान बार-बार ड्रोन व रॉकेट हमले हुए हैं।
भारत पहले ही 2019 से ईरान से कच्चे तेल का आयात लगभग बंद कर चुका है। इसलिए ईरान पर सीधे प्रतिबंधों का भारत के तेल आयात पर सीधा असर नहीं है। हालांकि, इराक भारत के सबसे बड़े कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक है और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव व एविएशन-प्रतिबंध जैसी घटनाएं वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता व कीमतों में उतार-चढ़ाव ला सकती हैं, जिसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर पड़ता है।
भारत का ईरान के चाबहार बंदरगाह में रणनीतिक निवेश है, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच के लिए अहम है। अमेरिका ने पहले इसे मानवीय आधार पर सीमित छूट दी थी, लेकिन ईरान पर बढ़ते व्यापक प्रतिबंधों के दौर में इस परियोजना से जुड़ी शिपिंग और बैंकिंग गतिविधियों पर अतिरिक्त सतर्कता व जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
बड़ी संख्या में भारतीय शिया श्रद्धालु हर साल इराक (नजफ, कर्बला) और ईरान (मशहद, कोम) के पवित्र स्थलों की जियारत के लिए जाते हैं। नजफ व बगदाद एयरपोर्ट से ईरान की उड़ानें बंद होने का सीधा असर भारतीय यात्रियों पर नहीं है (क्योंकि वे सीधे भारत से इराक या ईरान जाते हैं), लेकिन जो यात्री इराक होते हुए ईरान जाने की योजना बनाते हैं, उन्हें असुविधा हो सकती है। क्षेत्रीय अस्थिरता का परोक्ष असर: पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी कामगार रहते हैं और भारत का एक बड़ा हिस्सा व्यापार व ऊर्जा आपूर्ति इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। भारत सरकार आमतौर पर ऐसे मामलों में सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत से समाधान निकालने की अपील करती रही है।
Updated on:
26 Sept 2026 08:19 pm
Published on:
26 Sept 2026 08:19 pm
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