1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सीएम योगी ने दी लालजी टंडन को बधाई, बिहार को मिला नया राज्यपाल..

जानें लालजी टंडन के बारे में
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

लखनऊ

•

image

Mahendra Pratap Singh

•

Updated: 21 Aug 2018, 9:36 PM IST

Yogi visits Lalji Tandon

मूल रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहने वाले टंडन प्रदेश की भाजपा सरकारों में मंत्री भी रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उन्हें करीबी माना जाता रहा है। बिहार के मौजूदा गवर्नर सत्यपाल मलिक को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया है। सत्यपाल मलिक ने 30 सितंबर 2017 को बिहार का राज्यपाल का कार्यभार संभाला था। जम्मू-कश्मीर में पहले एनएन वोहरा राज्यपाल थे।

Yogi visits Lalji Tandon

लालजी टंडन का जन्म 12 अप्रैल 1935 में हुआ है। उनका राजनीतिक सफर साल 1960 में शुरू हुआ। टंडन दो बार पार्षद चुने गए और दो बार विधान परिषद के सदस्य रहे। मायावती और कल्याण सिंह की कैबिनेट में वह नगर विकास मंत्री रहे। कुछ वर्षों तक वह नेता प्रतिपक्ष भी रहे। लालजी टंडन ने जेपी आंदोलन में भी बढ़-चढकर हिस्सा लिया था। यूपी की सियासत में उनका अहम स्थान रहा है। राजनाथ सिंह व सीएम योगी से भी उनकी काफी करीबियां रही हैं। पिछले कई दिनों से चर्चा थी कि उन्हें बिहार का राज्यपाल बनाया जाएगा। उनके पुत्र आशुतोष टंडन योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

Yogi visits Lalji Tandon

लालजी टंडन ने पिछले दिनों एक किताब भी लिखी थी जिसके बाद विवाद शुरू हो गया था। उन्होंने लिखा था कि पुराना लखनऊ लक्ष्मण टीले के पास बसा हुआ था। अब 'लक्ष्मण टीला' का नाम पूरी तरह मिटा दिया गया है। यह स्थान अब 'टीले वाली मस्जिद' के नाम से जाना जा रहा है।' लखनऊ की संस्कृति के साथ यह जबरदस्ती हुई है। यह दावा उन्होंने अपनी किताब 'अनकहा लखनऊ' में किया है।

Yogi visits Lalji Tandon

पार्षद से लेकर कैबिनेट मंत्री और दो बार सांसदी तक का 8 दशक से अधिक का सामाजिक एवं सियासी सफर लखनऊ में पूरा करने वाले लालजी टंडन किताब में लिखते हैं कि लखनऊ के पौराणिक इतिहास को नकार 'नवाबी कल्चर' में कैद करने की कुचेष्टा के कारण यह हुआ। लक्ष्मण टीले पर शेष गुफा थी जहां बड़ा मेला लगता था। खिलजी के वक्त यह गुफा ध्वस्त की गई। बार-बार इसे ध्वस्त किया जाता रहा और यह जगह टीले में तब्दील हो गई। औरंगजेब ने बाद में यहां एक मस्जिद बनवा दी थी।