
बिना सिर की हड्डी खोले डॉक्टरों ने किया जटिल ऑपरेशन, निजी अस्पतालों में 15 से 20 लाख रुपये तक आ सकता है खर्च (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
Civil Hospital Lucknow: राजधानी के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) चिकित्सालय में न्यूरो सर्जरी के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मिली है। अस्पताल के डॉक्टरों ने पिट्यूटरी मैक्रोएडेनोमा (Pituitary Macroadenoma) नाम के बड़े ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया है। खास बात यह रही कि मरीज के सिर की हड्डी खोले बिना नाक के रास्ते ट्यूमर को बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की प्रभावित आंखों की रोशनी में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस जटिल सर्जरी को न्यूरो सर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी ने अंजाम दिया। सरकारी अस्पताल में इस तरह की विशेषज्ञ सर्जरी होने से मरीजों को बड़ी राहत मिली है।
जानकारी के मुताबिक, मरीज मूल रूप से देवरिया का रहने वाला है और दुबई में काम करता है। उसकी पिट्यूटरी ग्रंथि में ट्यूमर काफी बड़ा हो गया था। इसके कारण आंखों की नसों पर दबाव पड़ रहा था और धीरे-धीरे उसकी देखने की क्षमता प्रभावित हो रही थी। ऐसी स्थिति में समय पर इलाज और ऑपरेशन बेहद जरूरी था। डॉक्टरों ने जांच के बाद सर्जरी का फैसला लिया।
डॉ. विनोद कुमार तिवारी ने माइक्रोस्कोपिक ट्रांसनेजल ट्रांसस्फेनॉइडल सर्जरी (Microscopic Transnasal Transsphenoidal Surgery) तकनीक से ऑपरेशन किया। इस तकनीक में नाक के रास्ते स्फेनॉइड साइनस से होते हुए मस्तिष्क के आधार पर मौजूद पिट्यूटरी ग्रंथि तक पहुंच बनाई जाती है। इसके बाद माइक्रोस्कोप की मदद से ट्यूमर को बाहर निकाला जाता है। इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मरीज के सिर की हड्डी खोलने की जरूरत नहीं पड़ती। ऑपरेशन के बाद मरीज की आंखों की रोशनी में सुधार होना डॉक्टरों और परिजनों के लिए राहत की बात रही।
पिट्यूटरी ग्रंथि मस्तिष्क के निचले हिस्से में मौजूद एक महत्वपूर्ण ग्रंथि है। यह शरीर के कई जरूरी हार्मोन को नियंत्रित करती है। इसमें ट्यूमर विकसित होने पर कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। जब ट्यूमर का आकार बढ़ जाता है तो यह आसपास मौजूद ऑप्टिक नसों पर दबाव डाल सकता है। इससे आंखों की रोशनी कमजोर होने और देखने के दायरे में कमी आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह और समय पर उपचार काफी जरूरी होता है।
इस ऑपरेशन को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आमतौर पर इस तरह की जटिल सर्जरी निजी कॉरपोरेट अस्पतालों में काफी महंगी पड़ सकती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, निजी अस्पतालों में इस प्रकार के ऑपरेशन पर करीब 15 से 20 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है। हालांकि, वास्तविक खर्च अस्पताल और मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग होता है। ऐसे में लखनऊ के सिविल अस्पताल में इस स्तर की सर्जरी सफलतापूर्वक होना उन मरीजों के लिए उम्मीद की बात है, जो महंगे निजी अस्पतालों में इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं।
चिकित्सालय के निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि अस्पताल मरीजों को बेहतर और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद से गंभीर बीमारियों का उपचार संभव हो रहा है। इस जटिल ऑपरेशन में न्यूरो सर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी के साथ एनेस्थेटिस्ट डॉ. एसके सिंह भी शामिल रहे। अस्पताल की इस उपलब्धि से एक बार फिर साबित हुआ है कि सरकारी अस्पतालों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की मेहनत और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के दम पर जटिल ऑपरेशन किए जा सकते हैं। मरीज की आंखों की रोशनी में आया सुधार इस पूरी सर्जरी की सबसे बड़ी राहत भरी बात है।
Updated on:
1 Nov 2026, 2:48 PM IST
Published on:
1 Nov 2026, 2:41 PM IST
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