
शहीद क्रांतिकारी अश्फाक उल्ला खां के प्रपौत्र अश्फाक उल्ला खां बताते हैं कि उनके परदादा ने अंग्रेजी हुकूमत के सामने कभी घुटने नहीं टेके। सरकारी गवाह बनने से भी इंकार कर दिया और 19 दिसंबर 1927 को महज 27 साल की उम्र में वतन की खातिर फांसी पर झूल गए। परदादा की स्मृति में उनके प्रपौत्र का नाम उन्हीें के नाम पर रखा गया। शहीद अश्फाक उल्ला खां का अंतिम फोटो जो फांसी के बाद उनके परिवार को सौंपा गया था।

पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और अश्फाक उल्ला खां के बीच गहरी दोस्ती थी। वे हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल थे। यूपी के शाहजहांपुर स्थित इस स्कूल में दोनों ने पढ़ाई की थी।

शाहजहांपुर में क्रांतिकारी शहीद अश्फाक उल्ला खां का स्मारक।

जिन शहीदों की शहादत के बारे में आज के नौजवानों को प्रेरणा देनी चाहिए थी, उनकी शहादत को भुला दिया गया। शाहजहांपुर के रहने वाले शहीद अश्फाक उल्ला खां की मजार उनके ही शहर में बदहाली से जूझ रही है।