
पंकज श्रीवास्तव
गांधीनगर. गुजरात की राजधानी गांधीनगर में पांच विधानसभा सीटों पर दूसरे चरण में मतदान होना है। सत्ता विरोधी और पाटीदार आंदोलन के प्रभाव ने यहां भाजपा के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। यहां पर जीएसटी का कोई असर नहीं दिख रहा, हालांकि नोटबंदी की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में परेशानी नजर आई थी। इसी को भुनाने की कोशिश में है कांग्रेस। वह इसके लिए अपना पूरा दम-खम लगा रही है। कलोल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक बड़ी सभा करके भाजपा ने अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया है। पाटीदार आंदोलन के अलावा यहां ठेका नौकरी कर रहे कर्मचारियों में भी नाराजगी देखी जा रही है।
पिछले चुनाव में भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर रही थी। हालांकि जीत-हार का अंतर बहुत विशेष नहीं था। गत चुनाव में गांधीनगर जिले में 5 सीटों में से 2 सीटें भाजपा को और 3 सीटें कांग्रेस को मिली थीं। अगर उम्मीदवारों की बात करें तो जिले की सभी सीटों को मिलाकर कुल 48 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें से सिर्फ 3 महिलाएं हैं। गांधीनगर जिला प्रदेश के सबसे साक्षर पांच जिलों में चौथे नंबर पर है।
पांचों सीटों पर दिलचस्प मुकाबले
गांधीनगर जिले की पांचों सीट देहगाम, गांधीनगर उत्तर, गांधीनगर दक्षिण, मनसा व कलोल में 2012 में मुकाबले रोचक हुए हैं। जहां कलोल में मात्र 343 वोट से कांग्रेस जीती थी तो शेष 4 सीटों पर भी बड़ा अंतर नहीं था। इस बार कांग्रेस एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। प्रत्याशी चयन भी यहां मुकाबलों को रोचक बना रहा है। गांधीनगर दक्षिण में जहां ठाकोर के सामने ठाकोर हैं तो माणसा में अमित चौधरी कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा में आए हैं। ये पिछले चुनाव में कांग्रेस के टिकट से जीते थे। भाजपा जहां विकास के बलबूते सत्ता की वापसी की बात कर रही है वहीं कांग्रेस पाटीदार आंदोलन को हवा देकर जीत तय करने में जुटी है।
Published on:
10 Dec 2017, 9:29 AM IST
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