
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुलाकात का मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है। इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने झारखंड सरकार से रिपोर्ट मांगी है, तो वहीं रांची में भी इस मामसे में आंतरिक जांच शुरू हो गई है। बता दें कि बीते 30 अप्रैल को एम्स से छुट्टी मिलने पर रांची आने के पहले लालू यादव से राहुल गांधी ने मुताकात की थी।
एम्स में चल रहा था इलाज
गौरतलब है कि लालू चारा घोटाला मामले में जेल की सजा काट रहे हैं। स्वास्थ्य खराब होने की वजह से वह एम्स में अपना इलाज करा रहे थे, लेकिन वह एक सजायाफ्ता कैदी हैं। किसी भी बाहरी व्यक्ति को उनसे मिलने के लिए पहले जेल अधीक्षक से अनुमति लेनी होगी। लेकिन राहुल और लालू की मुलाकात जेल मैनुअल को ताक पर रख कर हुई। ऐसे में जेल प्रशासन से लेकर पुलिस-प्रशासन तक की सुरक्षा सवालों के घेरे में है।
छानबीन जारी
बता दें कि लालू की सुरक्षा में दिल्ली में तैनात रांची पुलिस के 19 पदाधिकारी-जवानों से कहां चूक हुई, इसकी छानबीन जारी है। वहीं इस जांच की जिम्मेदारी रांची के एसएसपी कुलदीप द्विवेदी ने डीएसपी कंपोजिट कंट्रोल रूम (सीसीआर) तुषार कांत झा को सौंपी थी। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।
अनुमति के बिना ही मुलाकात
वहीं, जब लालू से राहुल गांधी से मुलाकात हुई थी, उस वक्त एनएसजी के कमांडो भी मौजूद थे। बिना जेल प्रशासन की अनुमति के लालू से कोई मुलाकात नहीं कर सकता था। लेकिन, अनुमति के बिना ही राहुल की लालू से मुलाकात हुई।
बहरी व्यक्तियों से मिलने की अनुमति नहीं
आपको बता दें कि एम्स में इलाज के समय लालू से किसी भी बहरी व्यक्तियों को मिलने की अनुमति नहीं थी, इसके लिए सरकार के आदेश पर रांची से बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल के सहायक कारापाल दिनेश वर्मा को दिल्ली भेजा गया था। सहायक कारापाल को एक रजिस्टर रखना था और उन्हें ही निर्णय लेना था कि लालू से कब कौन मिलेगा।
Published on:
08 May 2018 09:27 pm
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