
सियासत में किस्मत आजमाने उतरे ये हैं IAS अफसर
नई दिल्ली। अमूमन नौकरशाह हुक्म के गुलाम होते हैं, लेकिन किसी की गुलामी उन्हें पसंद नहीं आती। राजनीति और समाजसेवा तो उन्हें बहुत कम ही रास आती है। IAS अधिकारियों को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं रहती है। लेकिन कुछ समय से नौकरशाहों का रंग बदलता जा रहा है। इनपर सियासी रंग चढ़ रहा है। ये अधिकारी समाजसेवा के बहाने अपनी सियासी भविष्य चमकाने में जुटे हैं। देश में पिछले कुछ समय से ऐसा देखने को मिल रहा है कि अधिकारी अब राजनीति में कदम रख रहे हैं। ताजा मामला तीन IAS अधिकारियों का है। केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह, रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी और 2010 बैच के IAS टॉपर शाह फैजल हैं। जिन्होंने अपनी नौकरी छोड़ राजनीति में एंट्री की है। हालांकि, कुछ नौकरशाह दिल से सेवा करना चाहते हैं तो कुछ पब्लिक स्टंट के लिए भी राजनीति का दरवाजा खटखटाते हैं। खासकर, पिछले कुछ समय से इसकी बयार सी आ गई। कोई देश सेवा की प्रण ले रहा है तो कुछ देश में बदलाव की 'आंधी' लाना चाहते हैं।
हिसार से लड़ रहे हैं बृजेंद्र सिंह
बृजेंद्र सिंह सियासत के लिए भले नया नाम हो। लेकिन ताल्लुक राजनीतिक परिवार से है। बृजेंद्र सिंह हाल ही में आईएएस की नौकरी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। हरियाणा के हिसार लोकसभा सीट से भाजपा ने प्रत्याशी घोषित किया है। बृजेंद्र सिंह केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं। बृजेंद्र भले ही केंद्रीय मंत्री के बेटे हैं। लेकिन इनकी पहचान एक तेजतर्रार अधिकारी के रूप में रही है। 1998 बैच के आईएएस अधिकारी बृजेंद्र सिंह ने पहली बार में ही यूपीएससी पास कर 9वां स्थान हासिल किया था और आर्ट्स विषय में सबसे ज्यादा नंबर लेकर पूर्व राजनयिक और विदेश मंत्री कुंवर नटवर सिंह का रिकॉर्ड तोड़ा था। अब वो चुनाव लड़ रहे हैं। बेटे को टिकट मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कैबिनेट और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। अब उनका बेटा सियासी सफर को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है।
भाजपा ने ओपी चौधरी को लड़ाया था विधानसभा चुनाव
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओमप्रकाश चौधरी ने सियासी सफर शुरू करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी। छत्तीसगढ़ में विधानसभा के दौरान 2005 बैच के इस आईएएस अफसर ने कमल थाम लिया था। भाजपा ने उन्हें खरसिया विधानसभा सीट से टिकट दिया था लेकिन वो चुनाव हार गए। भाजपा में शामिल होने से पहले चौधरी ने कहा था कि वो प्रशासनिक सेवा के कार्यों से संतुष्ट थे। लेकिन नौकरशाही की अपनी सीमाएं होती है। ऐसे में राजनीति में आकर अपने लोगों और अपनी माटी की और सेवा करना चाहते हैं और इसलिए यह नौकरी छोड़ने का फैसला किया।
2010 बैच के IAS टॉपर शाह फैसल की राजनीतिक ख्वाहिश
सिविल सेवा परीक्षा (2010) के टॉपर शाह फैसल ने इसी साल 9 जनवरी को IAS की नौकरी छोड़ राजनीति दांव आजमा रहे हैं। 'जम्मू कश्मीर पीपल्स मूवमेंट' नाम से अपनी राजनीतिक पार्टी की शुरुआत की। शाह फैसल (Shah Faesal) ने कश्मीर में कथित हत्याओं और इन गंभीर मामलों में केंद्र की ओर से गंभीर प्रयास नहीं करने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दिया था। शाह फैसल के एक विवादित ट्वीट से भी हंगामा मचा था। इसलिए उन्हें नोटिस भी जारी किया गया था। जो बाद में ठंडा पड़ गया था। फैसल ने नौकरी छोड़ने के बाद कहा था कश्मीर की जनता जैसा चाहेगी खासकर नौजवान उनसे क्या चाहते हैं। सियासत की पिच पर नौकरशाहों की कमी नहीं है। इनकी एक लंबी सूची है। देखना दिलचस्प होगा कि इनके दावे और वादे से राजनीति कितनी बदलती है।
Published on:
02 May 2019 07:02 am
