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स्वामी असीमानंद के बरी होने पर ‘भगवा आतंक’ पर घमासान, सबकी अपनी ढपली-अपना राग

एनआईए कोर्ट ने मक्का मस्जिद बम विस्फोट मामले में स्वामी असीमानंद समेत पांचों आरोपियों को बरी कर दिया है, लेकिन मामले पर अब जमकर राजनीति हो रही है।
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नई दिल्ली

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Chandra Prakash Chourasia

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Updated: 16 Apr 2018, 9:51 PM IST

Mecca Masjid blast case

नई दिल्ली। हैदराबाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने बेशक मक्का मस्जिद बम विस्फोट मामले में स्वामी असीमानंद समेत पांचों आरोपियों को बरी कर दिया है, लेकिन मामले पर अब जमकर राजनीति हो रही है। कांग्रेस ने कहा कि न तो पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और न ही किसी पदाधिकारी ने कभी भी 'भगवा आतंकवाद' शब्द का प्रयोग किया है और इस संबंध में विरोधियों द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं

कांग्रेस ने नहीं किया भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग: पुनिया
कांग्रेस प्रवक्ता पी.एल. पुनिया ने कहा कि मुझे ऐसा कोई भी वीडियो और ऑडियो क्लिप दिखा दीजिए, जिसमें कोई भी कांग्रेस पदाधिकारी भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग करता हुआ दिखाई दे रहा हो। भगवा आतंकवाद जैसी कोई चीज है ही नहीं। पुनिया ने कहा कि हमारा मानना है कि आतंकवाद किसी धर्म और समुदाय के साथ जुड़ा नहीं है। पुनिया ने हालांकि कहा कि यह सवाल बरकरार रहेगा कि कबूलनामा वाला बयान और अन्य दस्तावेज अभियोजन की फाइल से कैसे गायब हो गए। उन्होंने कहा कि अदालत का संपूर्ण आदेश आने से पहले टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। लेकिन अदालत ने कहा है कि अभियोजन मामले को साबित करने में विफल रहा।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई कमजोर हुई: ओवैसी
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इस मामले में न्याय नहीं हुआ। एक के बाद एक कई ट्वीट कर ओवैसी ने कहा कि एनआईए और मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने आरोपियों को दी गई जमानत के खिलाफ 90 दिनों की अवधि के अंदर अपील तक नहीं की थी। उन्होंने कहा, "जून 2014 के बाद गवाह अपनी गवाही से मुकरने लगे। वे सही बयान नहीं दे सके। पीड़ितों को परास्त करने के लिए सब कुछ किया गया। आज की दोषमुक्ति ने आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई को कमजोर किया है।"

हिन्दू द्रोही कांग्रेस के मुंह पर तमाचा: विहिप
विश्व हिन्दू परिषद् के अंतराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार ने अदालत के फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे हिन्दू द्रोही कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के मुंह पर करारा तमाचा करार दिया है। कुमार ने एक बयान में कहा, "हिन्दू आतंकवाद का शिगूफा रच कर निर्दोष हिन्दुओं को फंसाने के षडयंत्र की आड़ में विस्फोट करने वाले वास्तविक अपराधियों को बचा ले गई तत्कालीन कांग्रेस सरकार। असली अपराधियों के छूटने पर यदि कोई सर्वाधिक प्रसन्न हुआ था, तो वह था पाकिस्तान, जिसके लोग आसानी से भागने में सफल रहे।"

कौन-कौन हुआ बरी
बता दें कि एनआईए की एक अदालत ने वर्ष 2007 में यहां की मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट मामले के सभी पांचों आरोपियों को सोमवार को बरी कर दिया है। इसमें आरोपी बनाए गए हिंदू दक्षिणपंथी समूह अभिनव भारत के सभी सदस्य नबकुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, भरत मोहनलाल रातेश्वर उर्फ भरत भाई और राजेंद्र चौधरी शामिल हैं। कोर्ट में इन अभियुक्तों के खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हुआ है।

कब हुआ था ब्लास्ट
18 मई, 2007 को प्रतिष्ठित चारमीनार के पास स्थित मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान शक्तिशाली विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई थी और 58 लोग घायल हो गए थे। इस घटना के 11 साल बाद अदालत ने पाया है कि इन अभियुक्तों के खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हुआ है।