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असम: एनआरसी में उग्रवादी संगठन उल्‍फा नेता का नाम शामिल, पूर्व राष्ट्रपति के रिश्तेदार का नाम गायब

पूर्व राष्‍ट्रपति के रिश्‍तेदार एनआरसी के लिए समय पर जरूरी दस्‍तावेज नहीं जमा करा पाए थे।
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Dhirendra Kumar Mishra

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Updated: 31 Jul 2018, 1:43 PM IST

ali ahmed

असम: एनआरसी में उग्रवादी संगठन उल्‍फा नेता का नाम शामिल, पूर्व राष्ट्रपति के रिश्तेदार का नाम गायब

नई दिल्‍ली। असम में एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट सामने आने के बाद से विवादों का सिलसिला जारी है। इस मामले में एक नई जानकारी यह उभरकर सामने आई है कि इस मसौदे से पूर्व राष्‍ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के रिश्‍तेदारों का नाम भी इसमें नहीं है। इसके साथ ही कई अन्‍य प्रतिष्ठित लोगों के नाम भी इसमें नहीं है। लेकिन अभी तक यह स्‍पष्‍ट नहीं हो सका है कि पूर्व राष्‍ट्रपति के रिश्‍तेदारों ने जरूरी दस्‍तावेज संबंधित अधिकारियों के कार्यलय में जमा कराए थे या नहीं।

जरूरी दस्‍तावेज नहीं कराए जमा
अब इस बात का खुलासा होने के बाद छानबीन में पता चला है कि पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के भतीजे जियाउद्दीन अली अहमद का नाम भी एनआरसी में नहीं आया। इस बारे में उनका कहना है कि जरूरी दस्तावेज जिन्हें लिगेसी के तौर पर जमा कराना था वे नहीं कर सके। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार कुछ करेगी। जियाउद्दीन अली के पिता एकरामुद्दीन अली अहमद पूर्व राष्ट्रपति के भाई बताए जा रहे हैं। उनका परिवार असम के कामरुप जिले में रंगिया गांव में रहता है।

सूची से जांबाज अजमल हक भी बाहर
एनआरसी के ड्राफ्ट में सेना में सालों देश की सेवा करने वाले जांबाज अजमल हक का नाम भी नहीं है। सेना के इस सेवानिवृत अधिकारी को फॉरन ट्रि‍ब्‍यूनल में तलब किया गया था। उनसे अपनी नागरिकता के प्रमाण भी मांगे गए थे। ये भी कम दिलचस्प नहीं है कि उनके परिवार के तीन लोगों के नाम इस रजिस्टर में शामिल किए गए हैं। लेकिन उनका नाम नहीं है। इसी तरह भाजपा विधायक अनंत कुमार मालो का नाम भी ड्राफ्ट में नहीं है। आपको बता दें कि मालो दक्षिण अभयपुरी के विधायक हैं।

मसौदा में उल्‍फा प्रमुख का नाम शामिल
एक दौर में उग्रवादी संगठन उल्फा के चीफ रहे परेश बरुआ का नाम इस मसौदे में शामिल है। उनके बारे में बताया जा रहा है कि वो कहीं विदेश में भूमिगत जीवन जी रहा है। जबकि उसकी पत्नी और बच्चों के नाम इसमें नहीं हैं। जबकि उल्फा नेता के बच्चे यहीं पैदा हुए हैं। इस कारण उनके और बरुआ की बीवी के नाम होने चाहिए थे। इन मामलों में प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि इस मसौदे में जिन लोगों के नाम नहीं है उन्हें जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने के लिए मौका दिया जाएगा। बहुत से लोगों की चिंता ये है कि बाढ़ और दूसरी आपदाओं में उनके दस्तावेज गायब हो चुके हैं।