
मोदी-शाह (फाइल फोटो)
नई दिल्ली।झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक नई रणनीति बनाई है। भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी प्रमुख व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में राज्य में चुनाव लड़ेगी। साथ ही राज्य सरकार की उपलब्धियों पर रोशनी डालने के बजाय राष्ट्रीय मुद्दों को उठाएगी।
झारखंड में नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 13 नवंबर के बाद सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की दो सहयोगी पार्टियों के बीच गठबंधन टूट गया।
राजग की घटक जनता दल (युनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने भी अकेले-अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। ऐसे में भाजपा ने त्रिकोणीय मुकाबलों का सामना करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व की अगुवाई में चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई है। पार्टी को भरोसा है कि इस रणनीति से उसे तीन तरफ से फायदा होगा।
पार्टी के सामने सबसे बड़ी समस्या मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर है, क्योंकि राज्य भाजपा में रघुबर दास को अलोकप्रिय माना जा रहा है और यह बात पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा व अध्यक्ष अमित शाह तक पहुंच चुकी है।
सूत्रों का कहना है कि सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि इस चुनाव में भाजपा मुख्यमंत्री चेहरे को आगे नहीं करेगी। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने रघुबर के संदर्भ में कहा, "हम जानते हैं, उनसे मोहभंग हो गया है। लेकिन स्वीकार करता हूं कि चुनाव से पहले हम आत्मघाती स्थिति में होंगे। वह हमारे 'रामचंद्र' हैं।"
यह पूछे जाने पर कि प्रधानमंत्री कितनी रैलियों को संबोधित करेंगे, भाजपा नेताओं ने कहा, "मैं इतना ही कह सकता हूं कि बूथ अध्यक्षों से लेकर प्रधानमंत्री तक, सभी चुनाव प्रचार में सक्रिय रहेंगे।"
सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री झारखंड में महाराष्ट्र या हरियाणा से ज्यादा रैलियों को संबोधित करेंगे। हालांकि भाजपा के कई नेताओं ने स्वीकार किया कि इस बार चुनाव जीतना 2014 के चुनाव जितना आसान नहीं है।
Updated on:
14 Nov 2019 11:39 pm
Published on:
14 Nov 2019 11:36 pm
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