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राहुल गांधी का बड़ा आरोप, पीएम मोदी ने वायुसेना के बदले अंबानी को फायदा पहुंचाया

राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर सीधा हमला बोला और कहा कि अब ये साबित हो गया है कि चौकीदार चोर है।
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नई दिल्ली

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Dhirendra Kumar Mishra

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Updated: 8 Feb 2019, 11:45 AM IST

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राहुल गांधी ने पीएम मोदी से पूछे सवाल, देश हित में समझौता क्‍यों किया?

नई दिल्‍ली। पीएम मोदी द्वारा कांग्रेस पर हमला बोलने के बाद कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने आज उनपर पलटवार किया है। उन्‍होंने एक अखबार का हवाला देते हुए कहा कि मैं भारतीय सेना, वायु सेना, और नैवी के अधिकारियों व जबानों से बात करना चाहता हूं। उन्‍होंने कहा कि निर्मला सीतारमण ने झूठ बोला। उन्‍होंने पीएम मोदी पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी सीधे तौर पर रफाल डील से जुड़े हैं। पीएम मोदी ने खुद वायु सेना के 30 हजार रुपए चोरी किए। पीएम मोदी ने खुले तौर पर सौदेबाजी की। पीएम ने चोरी कर अनिल अंबानी को पैसे दिए। इससे ये साबित हो गया है कि चौकीदार चोर है।

दाल में काला है

एक तरफ राष्‍ट्रपति के बजट अभिभाषण पर पीएम नरेंद्र मोदी कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों पर कटघरे में खड़ा करने का काम कर रहे हैं तो दूसरी तरफ रॉफेल पर राहुल ने कहा कि कुछ न कुछ गड़बड़ी हुई है। दाल में काला है। लिहाजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डील से संबंधित पूछे गए तीन मूलभूत सवालों को जवाब देना चाहिए। उन्‍होंने पूछा है कि आखिर देश हित से पीएम ने समझौता क्‍यों किया? इसका जवाब उन्‍हें देना चाहिए।

अभी तक नहीं दिया जवाब
कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने संसद परिसर में कहा कि रक्षा मंत्री कहती हैं कि सीक्रेट है नहीं बता सकती हैं। लेकिन पहले कुछ और बात कहती थीं दोनों बयान उन्हीं के हैं। हमने पीएम से तीन सवाल पूछे हैं। अभी तक जवाब नहीं आए हैं। आपने विमान का क्या दाम दिया है। क्या कैबिनेट की रक्षा कमेटी से इस संबंध में पूछा गया था। सरकारी उपक्रम एचएएल से छीनकर इसे एक बिजनेस मैन को किस आधार पर दिया गया है।

विपक्ष का आरोप निराधान
बता दें कि केंद्र सरकार ने 58 हजार करोड़ के 36 राफेल जेट के सौदे के संबंध में विपक्ष के आरोपों को निराधार पहले ही बता चुकी है। सरकार ने कहा कि इस संबंध में विवरण के खुलासे की मांग अव्यावहारिक है और ऐसा करना राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने के बराबर होगा। सरकार की तरफ से कहा गया है कि राफेल सौदे के मूल्य और ब्योरे को सार्वजनिक करने की मांग को पूरा करना संभव नहीं है।