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मीरवाइज बोले, पाकिस्तान के मंत्री से मेरी बातचीत पर देश को नहीं होना चाहिए ऐतराज

मीरवाइज ने कहा कि- 'मैं यह समझ नहीं पा रहा हूं कि भारत सरकार की ओर से इतना ज्यादा निगेटिव रिएक्शन क्यों है।'
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नई दिल्ली

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Navyavesh Navrahi

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Updated: 31 Jan 2019, 10:00 PM IST

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मीरवाइज बोले, पाकिस्तान के मंत्री से मेरी बातचीत पर देश को नहीं होना चाहिए ऐतराज

हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारुक ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मोहम्मद कुरैशी से बातचीत के बाद विवादों में आ गए हैं। अब उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मोहम्मद कुरैशी के साथ हुई बातचीक पर देश भारत को कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा- कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए देश बातचीत का पक्षधर है तो उसे नाराज नहीं होना चाहिए। बता दें, पिछले दिनों मीरवाइज की पाकिस्तान के विदेश मंत्री से फोन पर बातचीत हुई थी। बातचीत के बारे में उन्होंने कहा कि- 'कुरैशी ने मुलाकात के दौरान मुझे आश्वस्त किया कि वह दोनों देशों के बीच विवाद के निपटारे को लेकर गंभीर हैं। करतारपुर कॉरिडोर का खुलना इस दिशा में ऐसा ही एक प्रैक्टिकल कदम था। पाकिस्तान लोकसभा चुनावों के बाद नई दिल्ली में बनने वाली नई सरकार के साथ बातचीत के लिए उत्सुक है।'

श्रीनगर में हुई बिलाल लोन की पीपल्स कॉन्फ्रेंस की पीपल्स इंडिपेंडेंट मूवमेंट के तौर पर री-लॉन्चिंग के अवसर पर मीरवाइज ने कहा कि- 'मेरा मानना है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान सलाहों के लिए तैयार हैं और उनकी समझ भी वह इस बात को साबित करना चाहते हैं कि वह कदम आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।'

मीरवाइज ने कहा कि- 'मैं यह समझ नहीं पा रहा हूं कि भारत सरकार की ओर से इतना ज्यादा निगेटिव रिएक्शन क्यों है।‘ उन्होंने कहा कि- भारत अगर पाकिस्तान के रिएक्शन को लेकर इतना ही चिंतित है तो फिर उसके हमले और घुसपैठ को रोके। आखिर भारत, पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर को ही बातचीत में शामिल होना होगा। इसके लिए एक स्वस्थ माहौल तैयार करना होगा।‘ मीरवाइज ने कहा कि- ‘भारत सरकार हमेशा से हुर्रियत को दबाती आई है, किंतु हकीकत को बयान करने से हमें नहीं रोक सकती है।'

गौर हो, पाकिस्तान के विदेशमंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अलगाववादी नेता मीरवाइज़ उमर फारूक से फोन पर बात कर भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का प्रयास किया है। कुरैशी ने हुर्रियत नेता के साथ कश्मीर मुद्दे को हाइलाइट करने के इस्लामाबाद के प्रयासों को लेकर चर्चा की। एक रिपोर्ट में नई दिल्ली के आधिकारिक सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि कुरैशी की ओर से अलगाववादी नेता से बातचीत को कर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। सरकार के सूत्रों का मानना है कि यह कदम पाकिस्तानी नेतृत्व के भारत के साथ संबंधों को लेकर दोहरेपन को दर्शाता है।