
अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना, PC- Chatgpt
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव परिणामों को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। वाराणसी में सपा के दोनों उम्मीदवारों की जीत को उन्होंने भाजपा की 'डबल हार' करार दिया। अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग लगातार डबल इंजन की सरकार, डबल रफ्तार और डबल विकास की बात करते थे, उन्हें अब जनता ने डबल हार और डबल जीरो का जवाब दिया है। उन्होंने इस जीत का श्रेय मतदाताओं के समर्थन और बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद को दिया।
अखिलेश यादव ने वाराणसी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के सभी मतदाताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से समाजवादी पार्टी के दोनों उम्मीदवारों को जीत मिली है। वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से आशुतोष सिन्हा और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज की है।
सपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी चुनावी जीत को लेकर किसी तरह का अहंकार नहीं रखती, लेकिन सत्ता में बैठे लोगों को जनता के फैसले से सबक लेना चाहिए।
उन्होंने कहा, "हम इस जीत को लेकर अहंकारी नहीं हैं, लेकिन जो लोग लगातार डबल इंजन की सरकार, डबल रफ्तार और डबल विकास की बात करते थे, उन्हें अब डबल हार मिली है। उन्हें डबल नुकसान और डबल जीरो मिला है।"
अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं ने अपने वोट के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है। उनके मुताबिक, यह परिणाम केवल दो उम्मीदवारों की जीत नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों को लेकर मतदाताओं की प्रतिक्रिया भी है।
अखिलेश यादव ने वाराणसी में मिली सफलता को बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से जोड़ते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी को इस धार्मिक नगरी में दोहरी जीत मिली है। उन्होंने कहा कि पार्टी शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं के प्रति आभारी है। वाराणसी स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा और शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव की जीत से कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है।
वाराणसी की दोनों विधान परिषद सीटों पर सपा की जीत राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। हालांकि, ये विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव थे, जिनका मतदाता वर्ग आम विधानसभा या लोकसभा चुनाव से अलग होता है।
सपा अध्यक्ष ने वाराणसी की संस्कृति और विरासत से जुड़े मुद्दों को लेकर भी प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मणिकर्णिका घाट पर ध्वस्तीकरण और पाल समाज के लोगों पर हुई पुलिस कार्रवाई का उल्लेख किया।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार ने बाबा विश्वनाथ की धार्मिक नगरी की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट पर हुई कार्रवाई और पाल समाज के लोगों पर लाठीचार्ज की घटनाओं को जनता नहीं भूली है।
उन्होंने दावा किया कि इन घटनाओं को लेकर लोगों में नाराजगी थी और चुनाव परिणामों में उसकी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। हालांकि, चुनाव परिणामों को सीधे इन घटनाओं का असर बताने वाला कोई स्वतंत्र मतदाता अध्ययन सामने नहीं आया है।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की कुल 11 शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव में भाजपा ने छह और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें जीती हैं। भाजपा को आगरा स्नातक, मेरठ स्नातक, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक, लखनऊ शिक्षक, मेरठ शिक्षक और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत मिली है।
वहीं, समाजवादी पार्टी ने वाराणसी स्नातक, वाराणसी शिक्षक, इलाहाबाद-झांसी स्नातक, लखनऊ स्नातक और आगरा-अलीगढ़ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की। समाजवादी पार्टी के विजयी उम्मीदवारों में आशुतोष सिन्हा, लाल बिहारी यादव, मान सिंह यादव, कांति सिंह और आकाश अग्रवाल शामिल हैं।
विधान परिषद चुनावों में सपा की सीटों की संख्या पिछले चुनाव के मुकाबले तीन से बढ़कर पांच हो गई है, जबकि भाजपा ने छह सीटों का आंकड़ा बरकरार रखा है। अखिलेश यादव इन परिणामों को वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा अब भी इन 11 सीटों में सबसे अधिक छह सीटें जीतने वाली पार्टी है।
ऐसे में चुनाव परिणामों को लेकर दोनों दलों की अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं सामने आई हैं। वाराणसी की दोनों सीटों पर जीत ने समाजवादी पार्टी को भाजपा के खिलाफ नया मुद्दा जरूर दिया है, लेकिन विधानसभा चुनाव में इसका कितना प्रभाव पड़ेगा, यह भविष्य के मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेगा।
Updated on:
3 Nov 2026, 3:41 PM IST
Published on:
3 Nov 2026, 3:41 PM IST
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