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नई पीढ़ी बदल रही भविष्य की राजनीति: राजस्थान निकाय चुनाव में युवाओं ने दिखाई ताकत, आगामी चुनाव में दिखेगा असर?

युवा शक्ति का प्रभाव अब चुनावी धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। युवा मतदाताओं और उम्मीदवारों की बढ़ती भागीदारी ने चुनावी राजनीति में बदलाव की बयार ला दी है। सवाल है कि आगामी विधानसभा या लोकसभा चुनावों में युवा शक्ति किस प्रकार प्रभाव डालेगी?
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Vinay Shakya

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Oct 21, 2026

Youth participation in politics

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

राजस्थान में युवा शक्ति का प्रभाव अब चुनावी धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। हालिया स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में ‘Gen‑Z’ यानी 18–29 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं और उम्मीदवारों की बढ़ती भागीदारी ने राजनीतिक समीकरणों को नया रूप दे दिया है।

युवा मतदाताओं की बढ़ती संख्या

राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में पंचायत चुनावों के लिए कुल 4 करोड़ 3 लाख से अधिक मतदाता हैं। इनमें लगभग 25 प्रतिशत, यानी करीब 1 करोड़ मतदाता, 29 वर्ष या उससे कम आयु के हैं। इनमें से लगभग 14 लाख युवा पहली बार मतदान करने जा रहे हैं, जो 18–19 वर्ष आयु वर्ग में आते हैं। यह युवा वर्ग अब केवल संख्या में ही नहीं, बल्कि निर्णायक शक्ति के रूप में भी उभर रहा है।

राजनीतिक दलों की युवा केंद्रित रणनीतियां

कांग्रेस ने ‘GenZ for Change’ अभियान शुरू किया है, जिसमें शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और नागरिक मुद्दों पर युवाओं से सीधे संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस अभियान के तहत प्रत्येक जिले और विधानसभा क्षेत्र में युवा समितियां गठित की जा रही हैं। वहीं, भाजपा ने ‘Student Feedback Programme’ शुरू किया है, जिसमें युवा मोर्चा, महिला मोर्चा और सोशल मीडिया टीम के सदस्य कॉलेजों, होस्टलों और कोचिंग संस्थानों में जाकर सीधे छात्रों से संवाद कर रहे हैं।

Gen‑Z उम्मीदवारों की जीत

निकाय चुनावों में युवा उम्मीदवारों की जीत ने राजनीति में उनकी उपस्थिति को और सशक्त किया है। जयपुर में कांग्रेस के 21 वर्षीय फैज हसन और अलवर में भाजपा की 21 वर्षीय नेहा शर्मा ने पार्षद पद जीतकर यह संदेश दिया कि युवा अब केवल मतदाता ही नहीं, बल्कि प्रतिनिधि भी बन रहे हैं। पूरे राज्य में कुल 10,244 पार्षद पदों में से 1,094, यानी लगभग 10.7 प्रतिशत Gen‑Z उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है, जबकि 30 वर्ष तक के पार्षदों की संख्या 1,388 (13.6 प्रतिशत) रही।

युवा वोटर और उम्मीदवार का दबदबा

शहरी क्षेत्रों में 18–25 वर्ष के मतदाताओं की संख्या 14.7 प्रतिशत और 26–35 वर्ष के मतदाताओं की संख्या 25.4 प्रतिशत है, यानी कुल 40.1 प्रतिशत शहरी मतदाता 35 वर्ष या उससे कम आयु के हैं। यह युवा वोट बैंक अब राजनीतिक दलों के लिए अनदेखा नहीं किया जा सकता।

चुनावी परिणामों पर असर

शहरी निकाय चुनावों में भाजपा ने 10 बड़े शहरों में से 8 में जीत दर्ज की और कुल वोटों में कांग्रेस से केवल एक लाख वोटों का अंतर रहा। भाजपा को 37.35 लाख और कांग्रेस को 36.35 लाख वोट मिले। यह नजदीकी मुकाबला युवा मतदाताओं की भूमिका को और स्पष्ट करता है।

राजनीतिक गढ़ों में युवाओं ने बदली तस्वीर

राजनीतिक रूप से मजबूत क्षेत्रों, जैसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, सचिन पायलट और गोविंद सिंह डोटासरा के गढ़ों में भी युवा पार्षदों की उपस्थिति बढ़ी है। यह संकेत है कि युवा नेतृत्व अब केवल नए क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि पुराने राजनीतिक गढ़ों में भी अपनी जगह बना रहा है।

भविष्य की राजनीति पर असर

युवा मतदाताओं और उम्मीदवारों की बढ़ती भागीदारी ने चुनावी राजनीति में बदलाव की बयार ला दी है। अब सवाल यह है कि आगामी विधानसभा या लोकसभा चुनावों में यह युवा शक्ति किस प्रकार प्रभाव डालेगी? राजस्थान की राजनीति अब युवा ऊर्जा से प्रेरित हो रही है। यह बदलाव केवल आंकड़ों में ही नहीं, बल्कि जमीन पर नए चेहरों, नए विचारों और नए वादों के रूप में भी दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में यह युवा शक्ति किस दिशा में जाएगी? यही तय करेगा कि राजस्थान की राजनीति किस नए युग में प्रवेश करती है।