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नोएडा प्लाट आवंटन घोटाला: इंजीनियर की जमानत पर सीबीआई से जवाब तलब, हाईकोर्ट की अन्य खबरें

सीबीआई अधिवक्ता ज्ञानप्रकाश का कहना है कि याची के आवास से एक सोने की ईंट मिली है और उस पर चालीस लाख रूपये घूस लेने का आरोप है।
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प्रयागराज

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Akhilesh Kumar Tripathi

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Updated: 29 May 2018, 9:53 PM IST

इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा भूमि आवंटन घोटाले के आरोपी यादव सिंह के साथ सह अभियुक्त नोएडा के प्रोजेक्ट इंजीनियर रामेन्द्र की जमानत अर्जी पर सीबीआई से दो हफ्ते में जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा तथा न्यायमूर्ति डी.के.सिंह की खण्डपीठ ने दिया है। सीबीआई अधिवक्ता ज्ञानप्रकाश का कहना है कि याची के आवास से एक सोने की ईंट मिली है और उस पर चालीस लाख रूपये घूस लेने का आरोप है।

आय से अधिक अकूत सम्पत्ति रखने की सीबीआई जांच की जा रही है। मुख्य अभियंता मेन्टीनेन्स यादव सिंह के बाद याची दूसरे नंबर का वरिष्ठ अधिकारी रहा है। प्लाट आवंटन घोटाले में इसकी सीधी भूमिका रही है। फिलहाल कोर्ट ने कोई अन्तरिम राहत न देते हुए सीबीआई से अर्जी पर जवाब मांगा है।


एसडीएम सिराथू तलब, कोर्ट आदेश के विपरीत निर्माण जारी रखने में हस्तक्षेप पर लगायी रोक
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एसडीएम सिराथू, कौशाम्बी को 30 मई को तलब किया है। कोर्ट ने एसडीएम से स्पष्टीकरण मांगा है कि किस अधिकार से कोर्ट के स्थगनादेश के बावजूद विपक्षी को निर्माण जारी रखने व याची को निर्माण में हस्तक्षेप न करने का आदेश पारित किया है। हाईकोर्ट में भी याचिका लम्बित रहते हुए कोर्ट आदेश के विपरीत आदेश पारित करने के लिए क्यों न आपराधिक अवमानना कार्यवाही कर दंडित किया जाय।


यह आदेश न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी तथा न्यायमूर्ति अशोक कुमार की खण्डपीठ ने सरफराज अहमद व अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता सुदर्शन सिंह ने बहस की। मालूम हो कि याची के पक्ष में भूमि को लेकर अन्तरिम आदेश है और हाईकोर्ट में भी याचिका लंबित है। विपक्षी जबरन निर्माण कर रहा है। उसकी अर्जी पर एसडीएम ने याची को निर्माण में हस्तक्षेप न करने का आदेश दिया। याची का कहना है कि ऐसा आदेश पारित करने का एसडीएम को अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हमें ऐसे किसी कानून की जानकारी नहीं है जिसके तहत एसडीएम कानून व्यवस्था के नाम पर अवैध रूप से हो रहे निर्माण पर हस्तक्षेप न करने का आदेश जारी कर सके। दोनों पक्षों के बीच याचिका हाईकोर्ट में लंबित है। ऐसे में एसडीएम का आदेश कोर्ट की अवमानना करना है। कोर्ट नेे एसडीएम सिराथू, जिला कौशाम्बी को स्पष्टीकरण के साथ 30 मई 2018 को हाजिर होने का आदेश दिया है।


अपर आयुक्त स्टैम्प अलीगढ़ तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला राजकीय अधिवक्ता (राजस्व) अलीगढ़ द्वारा राज्य सरकार की तरफ से मुकदमा दाखिल करने की अधिकारिता पर सरकार से पांच बार समय दिये जाने के बावजूद जवाब न आने पर अपर आयुक्त स्टैम्प अलीगढ़ को 30 मई को हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा ने सत्यवीर शर्मा व अन्य की याचिका पर दिया है। याची अधिवक्ता राघवेन्द्र मिश्रा का कहना है कि सरकारी अधिवक्ता को राज्य सरकार की तरफ से मुकदमा दाखिल करने का कानूनी अधिकार नहीं है।

स्टैम्प विवाद पर निर्धारित अर्थदण्ड व बकाया स्टैम्प शुल्क याची द्वारा जमा किया जा चुका है जिसे स्वीकार करने के बाद सरकार उसे चुनौती नहीं दे सकती। कोर्ट ने सक्षम अधिकारी से पूछा है कि किस कानून के तहत सरकारी वकील राज्य सरकार की तरफ से मुकदमा दाखिल कर सकता है। सरकारी अधिवक्ता (राजस्व) अलीगढ़ नरोत्तम सिंह ने अपनी मर्जी से याची के खिलाफ रिवीजन दाखिल कर दी। जिसे याचिका में चुनौती दी गयी है। सुनवाई तीस मई को होगी।

अपहरण व दुराचार के आरोपी की जमानत सशर्त मंजूर
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपहरण दुराचार व एस.सी./एस.टी.एक्ट के तहत आरोपी राकेश मौर्या की जमानत मंजूर कर ली है और अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार व पाक्सो एक्ट वाराणसी के जमानत अर्जी खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने याची को कई शर्ताें का पालन करने को कहा है और शर्तों का उल्लंघन करने की दशा में कोर्ट को जमानत निरस्त करने की छूट दी है।


यह आदेश न्यायमूर्ति राजुल भार्गव ने राकेश मौर्या की अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। याची के खिलाफ वाराणसी के चैबेपुर थाने पर अपहरण व दुराचार के आरोप में प्राथमिकी दर्ज है। याची अधिवक्ता उदयशंकर तिवारी का कहना था कि सह अभियुक्त नाबालिग प्रमोद यादव के साथ 15 वर्षीय पीड़िता वाराणसी से इटावा व कानपुर गयी। इस दौरान उसने अपने अपहरण की कोई आवाज नहीं उठायी। आरोप लगाया गया कि कैंट रेलवे स्टेशन पर रात नौ बजे उसके साथ दुराचार किया गया किन्तु डाक्टरी रिपोर्ट में इस आरोप की पुष्टि नहीं हो सकी। सह अभियुक्त पहले से ही जमानत पर है।

याची अधिवक्ता का यह भी कहना था कि याची निर्दोष है, उसे फंसाया गया है। पीड़िता के बयान से भी अपहरण के आरोप की पुष्टि नहीं होती। इसके बावजूद अपर सत्र न्यायाधीश वाराणसी ने 27 अप्रैल 17 को याची को जमानत देने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने याची को मुकदमे के विचारण में सहयोग करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने, आपराधिक कृत्य में लिप्त न होने की शर्ताें का पालन करने का निर्देश दिया है।

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