कोर्ट ने कहा है कि अपराध की विवेचना में कोर्ट को सामान्य तौर पर हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होता, विशेष स्थिति में ही कोर्ट विवेचना में हस्तक्षेप कर सकती है।प्रश्नगत मामले में यह नहीं कहा जा सकता कि संज्ञेय अपराध कारित नहीं हुआ है । कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा तथा न्यायमूर्ति डी. के सिंह की खंडपीठ ने दिया है।