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शाहजहांपुर दंगा: दो समुदाय के बीच हुए दंगा मामले में गिरफ्तारी पर रोक से हाईकोर्ट का इनकार, याचिका खारिज

राम प्रवेश शुक्ल व 10 अन्य आरोपियों के खिलाफ 25 अगस्त 18 प्राथमिकी दर्ज है जिसे याचिका में चुनौती दी गयी थी।
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प्रयागराज

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Ashish Kumar Shukla

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Updated: 1 Oct 2018, 10:24 PM IST

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शाहजहांपुर दंगा: दो समुदाय के बीच हुए दंगा मामले में गिरफ्तारी पर रोक से हाईकोर्ट का इनकार, याचिका खारिज

इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अगस्त 2018 में हुए शाहजहापुर दंगे के आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने एवं दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इंकार करते हुए याचिका को खारिज दिया है। राहुल शुक्ल उर्फ राम प्रवेश शुक्ल व 10 अन्य आरोपियों के खिलाफ 25 अगस्त 18 को बांदा थाने में प्राथमिकी दर्ज है जिसे याचिका में चुनौती दी गयी थी।

कोर्ट ने कहा है कि अपराध की विवेचना में कोर्ट को सामान्य तौर पर हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होता, विशेष स्थिति में ही कोर्ट विवेचना में हस्तक्षेप कर सकती है।प्रश्नगत मामले में यह नहीं कहा जा सकता कि संज्ञेय अपराध कारित नहीं हुआ है । कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा तथा न्यायमूर्ति डी. के सिंह की खंडपीठ ने दिया है।

मालूम हो कि शाहजहांपुर में हिन्दू व सिख समुदाय के लोगो के बीच दंगा भड़क गया था तोड़फोड़ के साथ ही कई पुलिस वाले व नागरिक घायल हुए और सरकारी व गैर सरकारी सम्पत्ति का भारी नुकसान हुआ। दंगे की शुरुआत एक छोटी से घटना को लेकर हुई। एक 13 साल की नाबालिग लड़की राखी बेच रही थी। उसके साथ छेड़खानी की गयी । जिसको लेकर बवाल बढ़ गया और दंगे का रूप ले लिया। दोनों पक्षो के खिलाफ एफ. आई. आर दर्ज हुई है। छेड़खानी की भी एफ. आई. आर दर्ज है। पुलिस विवेचना कर रही है। याची का कहना था कि उन्हें झूठा फंसाया गया है वे निर्दोष हैं। उसने राजेश जैन व 10 अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी। उन्होंने पेशबंदी में याचीगण को फंसाया है । केस फर्जी होने के नाते रद्द किया जाय।

सिख गुरु बाबा अमरीक सिंह के खिलाफ भी दंगे का आरोप लगाया गया है। किन्तु कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी से लगता है कि अपराध कारित हुआ है, जिसकी विवेचना में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं है ।