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वैध दावेदार को नियुक्ति न देकर कोर्ट का चक्कर लगवाने पर कोर्ट सख्त

प्रमुख सचिव माध्यमिक व शिक्षाधिकारियों पर क्यों न लगाये भारी हर्जाना: हाईकोर्ट
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प्रयागराज

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Akhilesh Kumar Tripathi

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Updated: 6 Aug 2018, 9:13 PM IST

allahabad High court

इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद. ‎इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विकलांग कोटे में कोर्ट आदेश पर नियुक्ति न कर मुकदमेबाजी में उलझाने की अधिकारियों के रवैये की तीखी आलोचना की है और प्रमुख सचिव माध्यमिक व अन्य शिक्षाधिकारियों से स्पष्टीकरण के साथ व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है और पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ भारी हर्जाना लगाया जाये और यह राशि उनके वेतन से वसूली जाय। याचिका की अगली सुनवाई आठ अगस्त को होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति एस.पी केशरवानी ने राकेश कुमार राय की याचिका पर दिया है। मालूम हो कि याची 27 सितम्बर 2014 की भर्ती विज्ञापन के तहत प्रशिक्षु स्नातक (एलटी ग्रेड) सहायक अध्यापक हिन्दी पर काउंसिलिंग के बाद चयनित हुआ। बस्ती मंडल में याची तीसरे स्थान पर था। पहले स्थान पर रहे अभ्यर्थी ने ज्वाइन नहीं किया तो दूसरे स्थान वाला लौटा नहीं तो याची नियुक्ति पाने का हकदार था, किन्तु उसे नियुक्ति नहीं दी गयी, तो उसने याचिका दाखिल की।

कोर्ट ने दो माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया। पालन न होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गयी। कोर्ट ने आदेश पालन का निर्देश दिया तो अधिकारी ने यह कहते हुए नियुक्ति देने से मना कर दिया कि समय से आवेदन नहीं दिया था। याची विकलांग कोटे में चयनित हुआ था। सीएमओ गोरखपुर ने प्रमाणपत्र जारी किया है। याची ने दुबारा याचिका दाखिल की।

कोर्ट ने अधिकारियों का आदेश रद्द करते हुए नये सिरे से आदेश जारी करने का निर्देश दिया। पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गयी। इसके बाद पुनः याची के दावे को खारिज कर दिया। इसके बाद तीसरी बार याचिका दाखिल की गयी है। कोर्ट ने अधिकारियों के रवैये को सही नहीं माना और कहा याची के वैधानिक दावे को मनमानेपूर्ण ढंग से निरस्त करना सरकार की लिटिगेशन नीति का माखौल उड़ाना है। कोर्ट ने कहा सरकार मुकदमेबाजी कम करना चाहती है और अधिकारियों के रवैये से याची को बार बार कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कोर्ट ने कहा है कि यदि हलफनामा दाखिल नहीं होता तो विपक्षी कोर्ट में हाजिर हो।

BY- Court Corrospondence