
अनाथालय के स्टोर रूम में रखी अलमारी को तोड़ लाखों के गहने व नकदी पार, अधिकारी व ट्रस्टी के उड़े होश
रायगढ़. चक्रधर बाल सदन की बर्खास्त अधीक्षिका ने जब एक माह बाद भी प्रभार नहीं सौंपा तो विभाग ने इसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की। जिसके बाद विभागीय अधिकारी, पुलिस, अनाथालय स्टॉफ, निवासरत बेटियां, समाजसेवी, ट्रस्ट के मैनेजर की एक संयुक्त टीम ने अनाथालय के ८ अलमारी को खंगालकर उसकी सूची बनाई। पर सबसे अहम वो दो अलमारी थे जिसमेंं दानदाताओं द्वारा दिए गए गहने व लाखों रुपए केे नकदी रखे हुए थे।
जिसे ट्रस्ट के भंग होने के बाद से ही अनाथालय के स्टोर रूम में रखा गया था। जब सभी अलमारी को खोल कर खंगालने की कवायद हुई तो स्टोर रूम के एक बड़े अलमारी को पहले से ही खुला पाया गया। जबकि उसमें रखे सोना-चांदी के गहने व नोटों के कई बंडल गायब मिले। लाखों रुपए के गहने व नकदी गायब मिलने के बाद ट्रस्ट के मैनेजर के साथ ही विभागीय अधिकारी व कर्मचारी ने हैरानी जताई।
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जिस बात का डर था, आखिर वहीं हुआ। राष्ट्रपति से पुरस्कृत चक्रधर बाल सदन को लूट-खसोट का अड्डा बनाने में वहां पदस्थ कुछ लोगों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। जिसकी पुष्टि बुधवार की देर शाम उसम समय हुई। जब अनाथालय की बर्खास्त अधीक्षिका सविता साव ने सेवा समाप्ति के करीब एक माह बाद भी चार्ज नहीं सौंंपा।
ऐसे में, अनाथालय में मौजूद सामान को लेकर विभग के बीच ऊहापोह की स्थिति थी। ऐसे में, बुधवार को विभागीय अधिकारी, अनाथालय की अधिकारी व कर्मचारी, समाजसेवी, भंग हो चुके ट्रस्ट के मैनेजर की एक संयुक्त टीम ने अनाथालय के ८ अलमारी को खंगाल। वहीं उसमें मौजद एक-एक सामान की सूची बनाई गई।
शुरूआती दौर में कार्यालय में रखेे गए ६ अलमारी में विभागीय कागजात के कुछ अन्य सामान मिले। पर सबसे अहम थो स्टोर रूम में रखी गई दो अलमारी थी। जिसमें दानदाताओं द्वारा अनाथालय के दुर्गा मंदिर व बेटियों के लिए गहनों के साथ नकदी भी दान में दिए थे। जो करीब ४ साल पहले अनाथालय ट्रस्ट के भंग होने के बाद से ही बंद रखा गया था। स्टोर ऐसे में स्टोर रूम का बड़ा अलमारी पहले से खुला हुआ था। जिसमें अनाथालय के भंग ट्रस्ट के मैनेजर सुनील सिंह ने अपने हाथों से खोला। तब उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
इस दौरान ये लोग रहे मौजूद
बुधवार को अनाथालय की ८ अलमारी को खंगालने के दौरान करीब एक दर्जन से अधिक लोग मौजूद थे। जिसमें जिला बाल सरंक्षण अधिकारी दीपक डनसेना, संस्थागत अधिकारी जयंती बेहरा, अनाथालय की परीविक्षा अधिकारी मनोरमा, रुपाली, मंजू देवांगन, निवासरत बेटियां, सीडब्ल्यूसी की पूर्व अध्यक्ष जस्सी फिलीप, ट्रस्ट के मैनेजर सुनील ङ्क्षसह, कोतवाली पुलिस के जवान व अन्य लोग थे। स्टोर रुम के अलमारी से गहने व नकदी पार होने की जानकारी विभाग को डीपीओ टिकवेंद्र जाटवर को देने पर वो भी अनाथालय पहुंचे हुए थे।
मामले में घूम रही शक की सुई
स्टोर रूम में रखी गई अलमारी से लाखों रुपए के गहने व नकदी के पार होने मेंं शक की सुई यहां कार्यरत स्टाफ पर जा रही है। कई तथ्य सामने आ रहे हैं जो इसकी ओर इशारा कर रहे हैं। मसलन अधीक्षिका के तैनाती के पूर्व आलमारी लॉक थी, बर्खास्तगी के एक माह बाद भी प्रभार नहीं देना, जांच के दौरान आलमारी का खुला पाया जाना कई संदेह को जन्म दे रहा है।
तीन नोटिस का नहीं दिया जवाब
विभागीय अधिकारी की माने तो बर्खास्त अनाथालय की अधीक्षिका सविता को चार्ज देने को लेकर ३ बार नोटिस दिया जा चुका है। पर तीनों नोटिस का उसने जवाब नहीं दिया। वहीं चार्ज देने को लेकर रुचि नहीं दिखाई। जिससे दाल में काला लगा। करीब एक माह इंतजार के बाद आखिरकार जब अलमारी को खोलने को सिलसिला पूरा हुआ। तब सच्चाई सामने आई।
-अनाथालय के ८ अलमारी की खोल कर उसमें सामान की जांच कर लिस्ट बनाई गई है। कुछ सामान नहीं मिले है। उसे पूर्व की सूची से मिलान करने की पहल की जाएगी। उसके बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है। अभी अलमारी को खंगालने की कवायद जारी है- टिकवेंद्र्र जाटवर, डीपीओ, म.बा.वि. विभाग, रायगढ़
Published on:
5 Jul 2018, 12:20 PM IST
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