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बहू-बेटे से परेशान दंपती ने लगाई गुहार, हाईकोर्ट ने कहा- उन्हें घर से निकालो

पीडि़त बुजुर्र्ग दंपती को राहत पहुंचाने के लिए कलक्टर ने चार सदस्यीय टीम गठित की है
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रायपुर

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Deepak Sahu

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Updated: 5 Aug 2018, 8:41 AM IST

CGNews

बहू-बेटे से परेशान दंपती ने लगाई गुहार, हाईकोर्ट ने कहा- उन्हें घर से निकालो

दुर्ग . माता पिता के दर्द का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है जब वह अपनी ही कोखजाई संतान के परिवार को घर से बेदखल करने के लिए कोर्ट में गुहार लगाए। सेक्टर 2 निवासी बीएसपी के रिटायर्ड कर्मचारी प्रमोद रंजनकर (88 वर्ष) के परिवाद पर हाईकोर्ट ने कलक्टर को मामले के त्वरित निराकरण करने के आदेश दिए हैं।

पीडि़त बुजुर्र्ग दंपती को राहत पहुंचाने के लिए कलक्टर ने चार सदस्यीय टीम गठित की है। यह टीम सोमवार को प्रमोद रंजनकर के घर से उनके बेटे व उसके परिवार को बेदखल करने की कार्रवाई करेगी। वृद्ध दंपती अपने बेटे-बहू के साथ बीएसपी आवास में रहते हैं। वे दोनों अपने बेटे के परिवार से इतने दुखी हो चुके हैं कि अब उनका साथ रहना मुश्किल हो चुका है। रिटायर्ड रंजनकर का कहना है कि वह कई बार बेटे अरुणांशु को अलग घर लेकर रहने को कह चुके हैं, लेकिन वह उलटा उन्हीं को प्रताडि़त कर कर रहा है। जानकारी के मुताबिक प्रमोद रंजनकर का बेटा अरुणांशु पूर्व सैनिक है। रिटायरमेंट के बाद वह इंडियन आइल में नौकरी कर रहा है। उसकी आमदनी अच्छी है। इसके बाद भी उसकी अपने पिता के क्वार्टर व उनकी जमा पूंजी पर नजर है।

वैसे तो रजंनकर के परिवार में कुल 5 सदस्य हैं। इसके बाद भी वृद्ध दंपती खाने के लिए मोहताज हैं। वे पिछले कई साल से बीएसपी क्वार्टर के एक कमरे में जीवनयापन कर रहे हैं। दोनों के लिए सुबह-शाम मेस से टिफिन आता है।

4. कमला यादव एसआइ

प्रमोद रंजनकर का कहना है कि वे सेक्टर 2 स्थित बीएसपी के आवास में शुरू से रह रहे हैं। रिटायरमेंट के बाद आवास को लीज स्कीम के तहत लिया है। कुछ पैसा उनके खाते में जमा है। उनका कहना है कि मकान उनकी कमाई का है। इसलिए उसे छोडऩा नही चाहते। अंतिम अवस्था में जीवनयापन के लिए उसके पास पर्याप्त पैसा है। इसलिए उन्हें बेटे के सामने हाथ फैलाने की आवश्यकता नहीं है।

अधिवक्ता सौरभ चौबे ने बताया कि पीडि़त बीएसपी कर्मचारी ने पहले सिविल कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत किया था, लेकिन परिवाद को न्यायालय ने खारिज कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट में अपील की गई। हाईकोर्ट ने परिवाद पर फैसला सुनाते हुए सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 के तहत निराकरण करने कलक्टर को निर्देश दिया है। यह पहला मामला है जब प्रदेश में सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।