
चंद्रकांता के पं. जगन्नाथ और चिडिय़ाघर के बाबूजी पहुंचे रायपुर, बोले- अभी भी सीख रहा एक्टिंग
ताबीर हुसैन @ रायपुर . 72 साल के अभिनेता राजेंद्र गुप्ता की सादगी देखकर हर कोई प्रभावित था। वे जिससे भी बातें करते सहज भाव से। मंझे हुए अभिनेता ने रायपुरवासियों का दिल जीत लिया। उन्होंने एक ऐसी बात कह दी कि हर कोई उनसे सीख ले सकता है। वे कहते हैं कि मैं अभी भी एक्टिंग सीख रहा हूं। सीखने की यात्रा आखिरी तक जारी रहेगी। अपने बारे में बताया कि मुझे पढ़ाई में बहुत ज्यादा इंट्रेस्ट था नहीं। किसी तरह ग्रेजुएट होकर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) ज्वाइन किया। वहां एक्टिंग और डायरेक्शन में स्पेशलाइज किया। 1972 से 84 तक मैंने दिल्ली व आसपास के शहरों में थियेटर करते हुए कई नाटकों को डायरेक्ट किया। वे मानते हैं कि आप किसी भी फील्ड में रहें, एक अरसे बाद उसमें सक्सेस हो सकते हैं बजाय एक्टिंग के। हो सकता है आप यहां जिदंगी के 20 साल भी दे दें लेकिन सफल न हों। इसलिए अगर एक्टिंग में आना चाहते हैं तो यह जान लीजिए कि कड़ी मेहनत के सिवा कोई आप्शन नहीं है तरक्की का। वे बीटीआई ग्राउंड में चल रहे किताब मेला के समापन समारोह में शामिल होने रायपुर आए। इससे पहले गुप्ता ने सड्डू स्थित जनमंच में पत्रिका से खास बात की।
इन धारावाहिकों ने दिलाई पहचान
मैं सन् 85 में मुंबई आ गया। यहां टीवी में इंतजार में मेन रोल मिला। इसके बाद कबीर। सन् 93 में चंद्रकांता में पं. जगन्नाथ से मुझे बहुत पॉपुलर्टी मिली। इसमें मेरा ही निगेटिव किरदार शनि भी था। चिडिय़ाघर में बाबूजी के किरदार ने मुझे नई पीढ़ी से परिचत कराया। साया में जगत नारायण की भूमिका काफी सराही गई। हालांकि इस बीच कई सीरियल किए। फिल्मों में भी नजर आने लगा था। अगर यूनिक प्ले की बात कहूं तो चाणक्यशास्त्र और कन्यादान था। दोनों अंग्रेजी में थे जो कि मुझे यूनिक लगे।
कर्म से लक का कोई ताल्लुक नहीं
मैं नहीं मानता कि कर्म से लक का कोई ताल्लुक होता होगा। अगर है भी तो आपको मेहनत को करनी ही है। कर्म का अगर है तो मेहनत जरूरी है। अगर आप इस फील्ड में आना चाहते हैं तो आपको काम दिखाना पड़ेगा। खुद को मांझना पड़ेगा। इसके बाद बने रहना और पोजिशन को मेंटेन करना अपनेआप में एक चुनौती है। हालांकि इन सब चीजों को आपको रिवार्ड भी मिलता है। इन सबके बावजूद यहां दूसरी लाइन से ज्यादा मेहनत है।
टीवी से उबने पर लिया गैप
छोटे परदे की खासियत है कि टीवी में रेगुलर काम होता है लेकिन सटेस्फेक्शन नहीं। कभी-कभी आप उब जाते हैं। मेरे साथ भी ऐसा हुआ कि मैंने 4-5 साल टीवी से गैप लिया। फिल्म का अलग ही कैल्कुलेशन है। नाम बिकने लगता है तभी बुलाया जाता है। ये जरूर है कि छोटे रोल मिलने में कोई दिक्कत नहीं होती।
इन फिल्मों में निभाई भूमिका
पीएम नरेंद्र मोदी, लगान, मिशन कशमीर, पान सिंह तोमर, हिम्मतवाला, बॉबी जासूस, विश्वरूपम, फेमस, मैं जिंदा हूं, हक, जान से प्यारा, प्रतिमूर्ति, बेनाम, राजा को रानी से प्यार हो गया, बस्ती, मुंबई से आया मेरा दोस्त, सत्यबोल, चमकू, वेल्डन अब्बा, रक्तचरित्र, ये फैसले, रिवाज , मैग्जीमम, जलपरी। धारावाहिकों में चिडिय़ाघर, साया, चंद्रकांता, बनूं मैं तेरी दुल्हन, हम लड़कियां, कुछ इस तरा, रणबीर रानो, व्योमकेश बख्शी, रावन, संविधान, बालिका वधु, एक था चंदर, एक थी सुधा, अल्पविराम।
अक्षय कुमार के साथ दो फिल्में आने वाली हैं
अक्षय कुमार के साथ पृथ्वीराज चौहान और सूर्यवंशी, जॉन इब्राहिम के साथ मुंबई सागा, नए-पुराने लोगों के साथ भवाई के अलावा अनफेयर एंड लवली में नजर आएंगे।
Published on:
24 Feb 2020 12:51 am
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