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रेरा रजिस्ट्रेशन में देरी के कारण, 4000 करोड़ के इन प्रोजेक्ट को नहीं मिल रहा बैंक लोन

भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) छत्तीसगढ़ के नियमों के फेर में रियल एस्टेट के लगभग 830 प्रोजेक्ट पर ऑफत आ पड़ी है।
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रायपुर

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Deepak Sahu

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Updated: 10 Jun 2018, 10:59 AM IST

RERA Bill

रेरा रजिस्ट्रेशन में देरी के कारण, 4000 करोड़ के इन प्रोजेक्ट को नहीं मिल रहा बैंक लोन

रायपुर . भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) छत्तीसगढ़ के नियमों के फेर में रियल एस्टेट के लगभग 830 प्रोजेक्ट पर ऑफत आ पड़ी है। इसकी बड़ी वजह यह है कि रेरा के नोटिफिकेशन के मुताबिक ऐसे प्रोजेक्ट जो रेरा में पंजीकृत नहीं है, उन्हें बैंक लोन नहीं दिया जाएगा। राज्य में इस कानून का पालन करते हुए कई बैंकों ने रेरा में गैर रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट को लोन देने से मना कर दिया है।

ऐसे में प्रदेश में लगभग 4000 करोड़ से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में जाने की आशंका है। इसमें सरकारी प्रोजेक्ट के निवेश का आंकलन करें तो यह राशि 10 हजार करोड़ के पार जाएगी। क्रेडाई छत्तीसगढ़ ने चिंता जताई है। क्रेडाई का कहना है कि यदि रजिस्ट्रेशन की रफ्तार नहीं बढ़ाई गई तो बिल्डरों पर ऑफत आना तय है। ऐसा नहीं है कि बिल्डर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए तैयार नहीं है। फरवरी से मई तक बिल्डरों ने रेरा में रजिस्ट्रेशन के लिए सैंकड़ों आवेदन दिए हैं, लेकिन रेरा में उम्मीदों के मुताबिक काफी कम संख्या में रजिस्ट्रेशन नंबर जारी किया गया है।

200 रजिस्ट्रेशन एजेंट्स का

बिल्डरों ने सवाल उठाया है कि 5 महीने में रेरा छत्तीसगढ़ ने सिर्फ 19 प्रोजेक्ट का पंजीयन किया है, जबकि विभाग के पास 850 आवेदन हैं। यदि यही स्थिति रही तो प्रोजेक्ट को रजिस्ट्रेशन नबंर जारी होने में कई साल लग जाएंगे। ऐसे में बैंक लोन नहीं मिलेगा। इस पर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट के पर्याप्त दस्तावेजों की कमी में लेटलतीफी हो रही है।

ऐसे प्रोजेक्ट जिसका रेरा में रजिस्ट्रेशन हो चुका है, नियमों के मुताबिक ऐसे प्रोजेक्ट्स के प्रमोटर और कंपनी का नंबर वेबसाइट में उल्लेख करना है, लेकिन वेबसाइट में न तो नंबर है और न ही प्रोजेक्ट से संबंधी दस्तावेज। दस्तावेजों में विभाग को ले-आउट, ग्राम एवं नगर निवेश से अनुमति की कॉपी आदि अपलोड करना है, ताकि उपभोक्ता दस्तावेजों की जांच कर सके।

3. व्यक्तिगत होमलोन के प्रकरणों में भी बैंक द्वारा ऐसे प्रोजेक्ट की प्रापर्टी पर होम लोन स्वीकृत किया जाए, तो कि रेरा में पंजीकृत हो।

1 मई 2017 के पहले के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट जिसे नगर-निगम से पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त हो चुका है, ऐसे प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन रेरा में अनिवार्य नहीं है।

रेरा पंजीयक के मुताबिक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन के लिए 31 मई तक विभाग को कुल 850 आवेदन प्राप्त हुए हैं। 1 जून को कोई नया आवेदन नहीं मिला है, वहीं एजेंट्स के पंजीयन की संख्या 200 तक पहुंच गई है।

रेरा छत्तीसगढ़ के पंजीयक अजय अग्रवाल ने कहा कि प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी करते हुए विभागीय जांच-पड़ताल और दस्तावेजों की बारीकी से निरीक्षण करने के बाद पंजीयन नंबर जारी किया जाता है। कई प्रोजेक्ट में दस्तावेजों की कमी रहती है। इसलिए लेटलतीफी होती है। हम प्रमोटर को नोटिस भेजते हैं। अन्य प्रोजेक्ट की स्क्रूटनी और जांच जारी है।

क्रेडाई छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष शैलेष वर्मा ने कहा कि रेरा में बिल्डर रजिस्ट्रेशन के लिए तैयार है। यही कारण है कि 800 से अधिक आवेदन पहुंचे हैं। हमारी मांग है कि रेरा में पूर्व में दिए गए आवेदनों की जांच-पड़ताल करते हुए वरीयता और प्राथमिकता के आधार पर सभी प्रोजेक्ट पर रजिस्ट्रेशन नंबर जारी किया जाए, ताकि प्रोजेक्ट जिंदा रहे।