Central Vista Project : कोरोना वायरस काल में छत्तीसगढ़ में सरकार का बड़ा फैसला

  • नवा रायपुर में राजभवन, सीएम हाउस, विधानसभा भवन, विधायक विश्रामगृह, मंत्रियों व अफसरों के बंगलों के निर्माण पर रोक
  • सरकार के फैसले के बाद कांग्रेस-भाजपा में सियासत गरमाई
  • पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार को छत्तीसगढ़ से सीख लेनी चाहिए

By: Anupam Rajvaidya

Published: 14 May 2021, 03:50 AM IST

रायपुर. पीएम नरेन्द्र मोदी सरकार के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर उठे विवाद के बाद छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने नया रायपुर में करीब 954.91 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है। इस राशि से राजभवन, सीएम हाउस, विधानसभा भवन, विधायक विश्रामगृह, मंत्रियों और अफसरों के बंगलों का निर्माण होना था। इसमें 591.75 करोड़ रुपए खर्च होने थे। इनका भूमिपूजन 25 अक्टूबर 2019 को धनतेरस के दिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में हुआ था।

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वहीं छत्तीसगढ़ सरकार ने 245.16 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले विधानसभा के नए भवन और 118 करोड़ की लागत से बनने वाले विधायक विश्रामगृह की निविदा भी निरस्त कर दी है। विधानसभा के नए भवन का शिलान्यास भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी की वर्चुअल मौजूदगी में 29 अगस्त 2020 को किया गया था। कोरोना वायरस संक्रमण काल में भूपेश बघेल सरकार का यह फैसला खर्च में कटौती करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने सवाल खड़े किए हैं। कोरोना काल में इसके निर्माण को एक तरह से फिजूलखर्च बताया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को कड़ा पत्र लिखा। इस पत्र में छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में हो रहे निर्माण कार्यों का भी जिक्र था। इसके बाद छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं ने इसे लेकर छत्तीसगढ़ सरकार को घेरना शुरू कर दिया था। इन सब के बीच लोक निर्माण विभाग ने गुरुवार को वित्त विभाग के निर्देशों का हवाला देते हुए नवा रायपुर में हो रहे विभिन्न निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी।
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कोविड-19 की वजह से बहुत सारी आर्थिक गतिविधियां रुकी हुई हैं। इसलिए यह कड़ा फैसला लेना पड़ा। वहीं, बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष विष्णु देव साय ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने शराब पर कोरोना सेस लगाकर 400 करोड़ रुपए वसूले। मुख्यमंत्री राहत कोष, डीएमएफ फंड, सीएसआर फंड, कर्मचारियों का 1 दिन का वेतन काटा गया, विधायक निधि की राशि ली गई। ये सब मिलाकर 1000 करोड़ रुपए तो हुए होंगे। सरकार को सभी पैसों का हिसाब देना चाहिए। वैसे भी निर्माण कार्यों को लेकर सरकार के पास बजट तो अलग से है। उधर, पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने पीएम नरेन्द्र मोदी को ट्वीट कर पूछा कि छत्तीसगढ़ से कब सीखेंगे?
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