
छत्तीसगढ़ में बिजली बिल पर राहत जारी (Photo Source- Patrika File Photo)
CG Cabinet Decision: छत्तीसगढ़ सरकार ने कैबिनेट की बैठक में आम लोगों को राहत देने वाला फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान (एम-ऊर्जा) योजना के तहत घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली बिल में मिल रही छूट जारी रहेगी। इसके साथ ही योजना का लाभ लेने के लिए 400 यूनिट तक मासिक बिजली खपत की पात्रता अवधि को 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब 7.25 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को फायदा मिलता रहेगा।
कैबिनेट ने एम-ऊर्जा योजना की पात्रता अवधि बढ़ाने का फैसला लिया है। पहले यह अवधि 30 सितंबर 2026 तक थी। अब पात्र उपभोक्ता 31 मार्च 2027 तक योजना का लाभ ले सकेंगे। सरकार ने घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली बिल में दी जा रही रियायत पहले की तरह जारी रखने का निर्णय लिया है। इससे पात्र परिवारों को बिजली बिल के खर्च में राहत मिलती रहेगी। सरकार के अनुसार, इस फैसले से प्रदेश के करीब 7.25 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को योजना का लाभ लगातार मिलता रहेगा। इसके अलावा अधोसंरचना विकास के लिए 500 करोड़ रुपये के मिशन को मंजूरी दी गई।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाएगा। एक एकड़ में अधिकतम 21 क्विंटल धान की खरीदी होगी। इस साल 360 नए केंद्र शुरू किए जाएंगे, जिससे कुल खरीदी केंद्रों की संख्या 3100 हो जाएगी। एग्रीस्टेक आईडी वाले पुराने पंजीकृत किसानों को दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं कराना पड़ेगा।
एम-ऊर्जा योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली बिल में मिलने वाली छूट जारी रहेगी। 400 यूनिट तक मासिक खपत की पात्रता अवधि 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है। इससे करीब 7.25 लाख उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
डामर की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते सड़क निर्माण ठेकेदारों को राहत देने का फैसला लिया गया है। ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के कार्यों के लिए 130.88 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। वहीं, राज्य वित्त पोषित सड़क कार्यों के लिए 70 से 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राहत का अनुमान है।
सरकारी कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इलाज की पूर्व अनुमति और भुगतान संबंधी दावों की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इससे कर्मचारियों को इलाज के दौरान अपनी जेब से पूरा खर्च देने और बाद में प्रतिपूर्ति का इंतजार करने से राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन-2026 को पांच साल के लिए मंजूरी दी गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलने वाले इस मिशन के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके तहत सड़क नेटवर्क की योजना, निर्माण कार्यों की निगरानी, गुणवत्ता जांच और सड़क सुरक्षा पर ध्यान दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन को मंजूरी दी गई है। यह मिशन अगले पांच साल तक चलेगा और इसके लिए करीब 500 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके तहत पर्यटन स्थलों पर सड़क, कनेक्टिविटी, सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य सुविधाएं बेहतर की जाएंगी। होमस्टे और निजी निवेश को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं, महिलाओं और स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे।
कैबिनेट ने राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े 9 मामलों को जनहित में अदालत से वापस लेने के लिए आगे की कार्रवाई की अनुमति दी है। यह निर्णय 30 सितंबर 2026 को हुई मंत्रिमंडलीय उपसमिति की अनुशंसा के आधार पर लिया गया है।
रायपुर जिले की नगर पंचायत कूंरा का नाम बदलकर कुंवरगढ़ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। कुंवरगढ़ अपने पुराने मंदिरों, ऐतिहासिक धरोहरों और तालाबों के लिए जाना जाता है। स्थानीय लोग लंबे समय से इसका पुराना नाम वापस रखने की मांग कर रहे थे।
सरकार ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत 1,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक निवेश वाली कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसका उद्देश्य कोयले का बेहतर उपयोग करना और आयात पर निर्भरता कम करने को बढ़ावा देना है।
छत्तीसगढ़ में कटघोरा से डोंगरगढ़ तक 295 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना के लिए कैबिनेट ने मंजूरी दी है। यह रेल लाइन तखतपुर, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ से होकर गुजरेगी। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 8,000 करोड़ रुपये है। इसमें राज्य सरकार और रेल मंत्रालय लगभग 1,000-1,000 करोड़ रुपये का योगदान देंगे। इससे रेल सुविधा से वंचित क्षेत्रों को कनेक्टिविटी मिलेगी और उद्योग, पर्यटन, रोजगार व कृषि उपज के बाजार तक पहुंच बेहतर होगी।
कैबिनेट ने पुनर्विकास योजना के दूसरे चरण में पांच परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इनमें दुर्ग का शासकीय पोल्ट्री फार्म, रामानुजगंज का वेटरनरी अस्पताल परिसर, जशपुर में पुलिस लाइन और रणजीता स्टेडियम के पीछे की जमीन, सक्ती का बुधवारी बाजार और धमतरी के रुद्री चौक की सरकारी जमीन शामिल हैं। इन परियोजनाओं को निजी क्षेत्र की भागीदारी से पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा।
राजनांदगांव जिले के ग्राम खपरीकला में केंद्रीय भंडारण निगम को 10 एकड़ जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। यहां भंडारण सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इससे कृषि उपज और अन्य वस्तुओं को सुरक्षित रखने की क्षमता बढ़ेगी। जमीन का आवंटन निर्धारित दरों और शर्तों के अनुसार किया जाएगा।
राजनांदगांव जिले के ग्राम सोमनी में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के माध्यम से मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग सेंटर बनाया जाएगा। इसके लिए 31.55 एकड़ जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। परियोजना में करीब 400 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इससे 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 5,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है। किसानों से सीधे फल खरीदने और उनकी उपज के प्रसंस्करण व बिक्री की बेहतर व्यवस्था भी विकसित होगी।
सुशासन एवं अभिसरण विभाग में तीन नए पद सृजित किए जाएंगे। इनमें आयुक्त/संचालक, अपर संचालक और विशेषज्ञ (अपर संचालक स्तर) का एक-एक पद शामिल है। इससे विभाग के कामकाज, प्रशासनिक समन्वय और सुशासन से जुड़ी योजनाओं को लागू करने में मदद मिलेगी।
नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन के वन मुख्यालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का एक अस्थायी पद एक साल के लिए बनाया जाएगा। इससे पीएम गति-शक्ति, प्रगति और परिवेश पोर्टल से जुड़े कामों की निगरानी और समन्वय में तेजी आएगी।
कैबिनेट ने दिवंगत डॉ. राकेश मोहन चंदोला की 19 अक्टूबर 1987 से 7 जनवरी 2022 तक की सेवा को परिवार पेंशन के लिए नियमित सेवा मानने का फैसला लिया है। इसके आधार पर पात्र परिवारजन को परिवार पेंशन, बकाया राशि और नियमानुसार ब्याज का भुगतान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों की पहचान से लेकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है। पहले चरण में अंबिकापुर, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, जगदलपुर और जशपुर में फीडर सेंटर बनाए जाएंगे। खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, विशेषज्ञ कोचिंग और खेल विज्ञान से जुड़ी सुविधाएं देने की योजना है।
कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में संशोधन को मंजूरी दी है। इससे औद्योगिक जमीन के उपयोग और आवंटन की प्रक्रिया आसान होगी। खाली या अतिरिक्त जमीन का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा और ई-नीलामी के जरिए पारदर्शी आवंटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे औद्योगिक भूमि से जुड़े विवाद कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
कृषक उन्नति योजना के तहत धान पर आदान सहायता राशि अब प्रति क्विंटल के बजाय प्रति एकड़ के आधार पर देने का निर्णय लिया गया है। खरीफ 2026 में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाएगा। सरकार के अनुसार, प्रति एकड़ सहायता से किसानों को खेती में उन्नत बीज, खाद, कीटनाशक, कृषि मशीनों और नई तकनीकों पर निवेश करने में मदद मिलेगी। इससे फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
Updated on:
27 Oct 2026, 6:41 PM IST
Published on:
27 Oct 2026, 6:18 PM IST
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