
रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में मांदर पर थाप देते कांग्रेस सांसद राहुल गांधी
रायपुर . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद राहुल गांधी ने एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन) और एनपीआर (नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर) को हिंदुस्तान की गरीब जनता पर लगाया गया टैक्स बताया है। गांधी ने शुक्रवार को यहां हवाईअड्डे पर संवाददताओं से बातचीत के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि चाहे एनआरसी (NRC) हो या एनपीआर (NPR) हो, यह हिंदुस्तान के गरीब लोगों पर एक टैक्स है।
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[typography_font:18pt]कागज बनवाने भी देनी पड़ेगी रिश्वत
राहुल गांधी ने पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) और गृहमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि (जिस तरह) नोटबंदी (demonetization) हिंदुस्तान के गरीब लोगों पर एक टैक्स था। बैंक में जाइए, पैसा दीजिए, अपने एकाउंट से पैसा नहीं निकालिए और पूरा का पूरा पैसा 15 से 20 लोगों को दे दिया गया। यह (एनआरसी, एनपीआर) भी बिल्कुल वही चीज है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब गरीबों को कागज बनवाने के नाम पर रिश्वत देनी पड़ेगी। उन्होंने इसे गरीबों पर हमला करार दिया। गांधी ने अर्थव्यवस्था और रोगजार की स्थित पर केंद्र सरकार को घेरा।
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[typography_font:18pt]बेरोजगारी 45 साल में सबसे ज्यादा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि आज पूरी दुनिया में कहा जा रहा है कि हिंदुस्तान (Hindustan) में हिंसा हो रही है। महिलाओं को यहां सड़कों पर नहीं चलने दिया जा रहा है और बेरोजगारी 45 साल में सबसे ज्यादा है... लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) कुछ कर नहीं पा रहे हैं।
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[typography_font:18pt]हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था नहीं चलाई जा सकती
राहुल गांधी छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजधानी रायपुर (Raipur) में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव (National Tribal Dance Festival) का शुभारंभ करने पहुंचे थे। इस मौके पर आयोजित सभा में गांधी ने कहा कि सभी धर्मों, जातियों, आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों को साथ लिए बिना हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था नहीं चलाई जा सकती। केंद्र सरकार (Modi Government) को इंगित करते हुए गांधी ने कहा कि जब तक आप इस देश को जोड़ेंगे नहीं, जब तक देश के लोगों की आवाज विधानसभाओं और लोकसभा (Lok Sabha) में सुनाई नहीं देगी, तब तक ना ही रोजगार और ना ही अर्थव्यवस्था के बारे में कुछ किया जा सकेगा। क्योंकि अर्थव्यवस्था को किसान, मजदूर, गरीब, आदिवासी ही चलाते हैं।
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Published on:
27 Dec 2019 07:57 pm
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