राखी पर छाया कोरोना का साया, बहनें जहां हैं वहीं से करेंगी दीर्घायु की कामना

- कोरोना की भेंट चढ़ा भोलेबाबा के अभिषेक पूजा का विशेष सप्ताह।

By: Bhupesh Tripathi

Updated: 27 Jul 2020, 03:55 PM IST

रायपुर. पहले लॉकडाउन से अधिक सख्ती हो गई, क्योंकि कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ा है। पहले नवरात्रि पर्व पर मातारानी के पूजा-दर्शन से भक्त दूर हो गए थे। अब भोलेबाबा के अभिषेक पूजा के लिए विशेष सावन मास का पूरा सप्ताह कोरोना की भेंट चढ़ गया है। शहर के प्रमुख शिवालयों और सबसे प्राचीन महामाया मंदिर का मुख्य दरबाजा भक्तों के लिए बंद हो गया है। सिर्फ मंदिरों के पुजारी ही भगवान की आरती पूजा करेंगे। इसलिए कोरोना से मुक्ति के लिए घरों में भोलेबाबा की पूजा करनी होगी। एेसी ही स्थिति भाई-बहन के पवित्र प्रेम के पर्व रक्षाबंधन बन रही हैं। रायपुर में लॉक डाउन लगने से एक दिन पहले मंगलवार को शहर के मुख्य डाक घर सहित अनेक जगहों पर भाइयों को राखियां, गिफट भेजने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग तार- तार हुई।

28 जुलाई तक तालाबंदी, चौथा सोमवार भी लॉकडाउन
धार्मिक महत्व के महादेवघाट हटकेश्वर नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी सुरेश गिरी ने बताया कि जिला प्रशासन के आदेश पर भक्तों के लिए ताला लगा दिया है। भोलेबाबा की पूजा का विशेष दिन सावन का चौथा सोमवार २७ जुलाई को है। उसी दिन भी भक्तों को घरों में ही पूजा करनी होगी। प्राचीन बुढ़ेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी महेश पांडे ने बताया कि प्रवेश पर रोक लग गई। महामाया मंदिर के पंडित मनोज शुक्ल ने बताया कि मुख्य दरबाजे पर ताला लग गया है।

रक्षाबंधन पर्व 3 अगस्त को, घर से दीर्घायु की कामना
29 साल बाद रक्षाबंधन पर्व पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है। भाई-बहनों के पवित्र प्रेम का यह पर्व 3 अगस्त को पड़ रहा है। सुबह 9.30 बजे से दिनभर रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त है। लेकिन कोरोना के कारण जिन भाई-बहनों के पास खुद का वाहन है, वे आना कर सकेंगे। लेकिन आम लोगों के लिए न तो लोकल ट्रेनें चल रही हैं और सभी जगहों के लिए बसें। एेसी स्थिति में बहनें जहां हैं, वहीं से भाइयों के दीर्घायु की कामना करेंगी।

1 अगस्त को बकरीद : कुर्बानी की परंपरा बदलेगी
एेसा संकट की सब तीज-त्योहार कोरोना की भेंट चढ़ते जा रहे हैं। 28 जुलाई तक लॉकडाउन है और 1 अगस्त को बकरीद है। शास्त्री बाजार के पास अनेक राज्यों से बकरों का बाजार सप्ताहभर पहले से लग जाता था। इस बार नहीं लगेगा। सीरत कमेटी के पूर्व अध्यक्ष नोमान अकरम हामिद ने बताया कि राजधानी में 25 से 30 हजार बकरे बकरीद पर लोग खरीदते थे। कुर्बानी की परंपरा बदलेगी, एक बकरे की कीमत 8 से 10 लोग देंगे। सिर्फ कुर्बानी की रस्में करेंगे।

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