
कोरबा. नए वेतन समझौते में देरी से कोयला कामगारों के बीच नाराजगी बढ़ रही है। नाराज कर्मी नौ दिसंबर को सभी एरिया में प्रदर्शन कर विरोध दिवस मनाएंगे। इसके लिए कोयला कामगारों के बीच तैयारियां शुरू हो गई है। प्रदर्शन में कोल इंडिया की चारों प्रमुख श्रमिक संगठन बीएमएस, एचएमएस, एटक और सीटू के प्रतिनिधि के अलावा इंटक को भी शामिल किया गया है। इसे लेकर स्थानीयस्तर श्रमिक संगठनों के बीच रणनीति बनाई जा रही है।
नए वेतन समझौते पर चर्चा के लिए 30 नवंबर को कोल इंडिया मुख्यालय कोलकता में जेबीसीआई की बैठक हुई थी। बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी। इससे नाराज श्रमिक संगठनों ने आपस में एक बैठक की थी। इसमें नौ दिसंबर को विरोध दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था। इसके पहले श्रमिक संगठनों ने जेबीसीआई की बैठक में मिनिमम गरंटेड बेनिफिट में 28 फीसदी की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दिया था। प्रबंधन की ओर से एमजीबी में 10.50 फीसदी का प्रस्ताव रखा गया था। इसपर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी थी।
- डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राजेज की गाइड लाइन में छूट का इंतजार
नए वेतन समझौते में देरी की वजह डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राजेज (डीपीई) की गाइड लाइन को बताया जा रहा है। मौजूदा गाइड लाइन के आधार पर वेतन समझौता मुश्किल है।
वेतन समझौते पर बातचीत के लिए कोल इंडिया प्रबंधन को डीपीई की गाइड लाइन में छूट का इंतजार है। अभी यह गाइड लाइन कोल इंडिया को नहीं मिली है। सात सितंबर को कोल इंडिया के कार्मिक निदेशक विनय रंजन ने कोयला मंत्रालय के निदेशक (कानून एवं औद्योगिक संबंध) को पत्र लिखकर बताया था कि डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राजेज की गाइड लाइन में छूट के बिना वेतन समझौता संभव नहीं है।
Published on:
7 Dec 2022, 12:54 PM IST
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