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भारत में जैविक खेती का विस्तार, 30 लाख हेक्टेयर के साथ छत्तीसगढ़ पहले नंबर पर

बदलाव: सेहत को लेकर लोग सजग, एफआईबीएल सर्वे-2022 की रिपोर्ट से खुलासा.
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रायपुर

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Bhupesh Tripathi

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Updated: 3 Feb 2023, 4:43 PM IST

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रायपुर. कोरोना महामारी के बाद देश के लोग स्वास्थ्य को लेकर सजग हुए हैं। इसी कारण देश में न सिर्फ औषधीय फसलों बल्कि जैविक खेती का भी विस्तार हुआ है।

रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर के एफआईबीएल सर्वे-2022 की रिपोर्ट में इस ट्रेंड का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया के शीर्ष तीन ऐसे देशों में शुमार हो गया है, जहां जैविक कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक विस्तार हुआ है। इसमें छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान आदि ऐसे राज्य हैं, जहां जैविक कृषि भूमि का विस्तार हो रहा है। 2020 में वैश्विक स्तर पर जैविक खेती के तहत कुल वृद्धि 30 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई। इसमें अर्जेंटीना ने सर्वाधिक 7.81 लाख हेक्टेयर जैविक कृषि क्षेत्र में वृद्धि की है। इसके बाद उरुग्वे ने 5.89 लाख हेक्टेयर तो भारत ने 3.59 लाख हेक्टेयर का इजाफा किया है।

यहां इतना हो गया जैविक कृषि क्षेत्र: स्टेटिस्टा की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022 तक छत्तीसगढ़ में पूरे भारत में सबसे ज्यादा 30.08 लाख हेक्टेयर जैविक कृषि क्षेत्र पाया गया। इसके बाद 23 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जैविक कृषि भूमि के साथ मध्यप्रदेश दूसरे स्थान पर रहा।

जीडीपी और रोजगार को सहारा
जैविक खाद्य बाजार में तेज वृद्धि से बेहतर स्वास्थ्य के साथ आय के भी स्रोत बढ़ेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, जैविक कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था को बूस्टर दे सकती है। कृषि उद्योग क्षेत्र देश की जीडीपी में करीब 14% योगदान देने के साथ करीब 42 फीसदी लोगों को रोजगार भी दे रहा है।

देश में 1.5% भूमि पर ही जैविक खेती
देश में जैविक कृषि क्षेत्र में तेजी से विस्तार के बावजूद भारत के कुल कृषि क्षेत्र के मात्र 1.5% भूमि पर ही जैविक खेती होती है। वहीं, दुनिया में कुल कृषि क्षेत्र की सर्वाधिक 41.6% जैविक भूमि लिकटेंस्टाइन के पास, 26.5 फीसदी ऑस्ट्रेलिया तो 22.4% एस्टोनिया के पास है।

किसानों को राष्ट्रीय मिशन से उम्मीद
किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए राष्ट्रीय मिशन बनाने वाली कृषि मंत्रालय की 2481 करोड़ की योजना से उम्मीद है। वर्ष 2025-26 तक की इस योजना का लक्ष्य 7.50 लाख हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती के लिए 7.5 लाख किसानों को साथ लाना है। इसके तहत किसानों को 15000 रुपए प्रति हेक्टेयर नुकसान पर मिलेंगे।