
Chhattisgarh News: शरीर पर न तो डंक का कोई निशान था और न ही किसी ने सांप को देखा था, लेकिन अचानक बिगड़ी तबीयत और गहरी बेहोशी ने सभी को हैरान कर दिया। रायपुर स्थित इट्सा हॉस्पिटल्स (कान्हा) के शिशु रोग विशेषज्ञों ने क्लीनिकल लक्षणों के आधार पर छिपे हुए सर्पदंश (करैत) की समय पर पहचान कर एक 6 वर्षीय मासूम को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया। तीन दिनों तक वेंटिलेटर पर अचेत रहने के बाद बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने पैरों पर चलकर घर लौट चुकी है।
परिजनों के अनुसार, बच्ची सुबह अचानक पेट में तेज दर्द की शिकायत के साथ उठी। शुरुआत में इसे सामान्य दर्द समझा गया, लेकिन देखते ही देखते उसे चक्कर आने लगे और सांसें धीमी पड़ने लगीं। अस्पताल पहुंचने से पहले ही वह पूरी तरह बेसुध हो चुकी थी। अत्यंत गंभीर हालत में उसे अस्पताल के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए उसे तुरंत जीवन रक्षक वेंटिलेटर सपोर्ट पर लिया।
अस्पताल के डायरेक्टर व वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सचिन पिटलावर तथा पीडियाट्रिक इंटेंसिविस्ट डॉ. स्वास्ति केशरी के नेतृत्व में डॉ. ओनम, डॉ. कशीफा, डॉ. मयंक और डॉ. अर्घदीप की टीम ने जांच शुरू की। बच्ची के शरीर पर किसी चोट या सांप के काटने का कोई बाहरी निशान नहीं था। इसके बावजूद अचानक उठा पेट दर्द, फेफड़ों की घटती सक्रियता और मांसपेशियों का सुन्न पड़ना न्यूरोटॉक्सिक सांप (विशेषकर करैत) के विष की ओर इशारा कर रहे थे। ब्रेन इन्फेक्शन और फूड पॉइजनिंग जैसी अन्य संभावनाओं की तुरंत जांच कर उन्हें खारिज किया गया। डॉक्टरों ने जोखिम लेते हुए तत्काल 'एंटी स्नेक वेनम' (एएसवी) थेरेपी शुरू कर दी।
करैत जैसे अत्यधिक विषैले न्यूरोटॉक्सिक सांप के काटने पर दर्द या दांतों के निशान अक्सर नहीं मिलते। इसका जहर सीधे तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है, जिससे मांसपेशियां सुन्न हो जाती हैं और मरीज कई बार 'ब्रेन डेड' जैसा दिखाई देने लगता है। ऐसे में हर एक मिनट कीमती होता है। सही समय पर एंटी वेनम और वेंटिलेटर सपोर्ट मिले तो मरीज को नई जिंदगी मिल सकती है।"
— डॉ. स्वास्ति केशरी, पीडियाट्रिक इमरजेंसी मेडिसिन व इंटेंसिविस्ट
दिखाई नहीं देते निशान: करैत के दांत बेहद बारीक होते हैं, इसलिए अक्सर शरीर पर कोई सूजन, खून या निशान नहीं दिखता।
शुरुआती लक्षण: सुबह के वक्त पेट में मरोड़ के साथ तेज दर्द, उल्टी, बोलने या निगलने में कठिनाई और पलकों का झुकना।
तत्काल कदम: बिना कारण सांस लेने में तकलीफ या अचानक बेहोशी आने पर घरेलू नुस्खों या झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें; सीधे ऐसे अस्पताल पहुंचें जहां पीआईसीयू और वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध हो।
Updated on:
12 Sept 2026 01:15 pm
Published on:
12 Sept 2026 01:14 pm
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