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Chhattisgarh School: नवापारा के इस सरकारी स्कूल में कभी भी हो सकती है बड़ी अनहोनी, हालत देख खराब हो जाएगा दिमाग

GobraNavapara: स्कूल का भवन वर्षों से जर्जर हालत में है और कई हिस्सों से मलबा झड़ने लगा है। इसके बावजूद छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर यहां पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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रायपुर

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विनोद जैन

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Updated: 4 Jun 2026, 5:43 PM IST

Chhattisgarh School

जर्जर मिडिल स्कूल भी बना खतरा (Photo Patrika)

Chhattisgarh School: गोबरा नवापारा के समीपस्थ ग्राम पंचायत सोनेसिली में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से जूझ रही है। प्राथमिक शाला का भवन वर्ष 2016 में जर्जर होने के कारण तोड़ दिया गया था, लेकिन आज तक नया भवन नहीं बन पाया है। इसके चलते विद्यार्थियों को सीमित कमरों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

Chhattisgarh School: विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों परेशान

सरपंच अजय कुमार साहू ने बताया कि विद्यालय में अतिरिक्त कक्षों के सहारे पढ़ाई संचालित की जा रही है। एक ही कमरे में पहली और दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाया जाता है, जबकि दूसरे कमरे में तीसरी और चौथी कक्षा संचालित होती है। पांचवीं कक्षा की पढ़ाई प्रधान पाठक के कक्ष में कराई जा रही है। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

छत से लगातार गिर रहा मलबा

स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए है क्योंकि गांव का मिडिल स्कूल भवन भी काफी जर्जर हो चुका है। भवन की छत से लगातार मलबा झड़ रहा है, बावजूद इसके बच्चे उसी भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन अब तक भवन की मरम्मत या नए निर्माण के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

15 जून से नए सत्र की शुरुआत

15 जून से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है। ऐसे में अभिभावकों और ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्राथमिक शाला के नए भवन की स्वीकृति तथा जर्जर मिडिल स्कूल भवन की मरम्मत या पुनर्निर्माण की मांग की है। एक ओर भवन विहीन प्राथमिक स्कूल, दूसरी ओर जर्जर मिडिल स्कूल—आखिर बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

गांव के लोगों ने कहा

गांव के लोगों का कहना है कि जब सरकार शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात करती है, तब भवन विहीन स्कूल और खस्ताहाल स्कूल भवनों में पढ़ रहे बच्चों की स्थिति कई सवाल खड़े करती है। एक ओर बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है, वहीं दूसरी ओर उनकी सुरक्षा भी खतरे में है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई करता है।

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