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छत्तीसगढ़ के इस डेंटल कॉलेज को नहीं मिली पोस्ट ग्रेजुएशन सीट की मान्यता, दिसंबर में होगा फैसला

रायपुर में पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) सीट में दाखिला देने अब तक मान्यता नहीं मिली है।
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रायपुर

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Chandu Nirmalkar

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Updated: 25 Oct 2017, 9:37 PM IST

CG news

raipur dental college

रायपुर . राजधानी के शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर में पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) सीट में दाखिला देने अब तक मान्यता नहीं मिली है। पिछले दिनों डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीआई) की टीम कॉलेज का निरीक्षण करने पहुंची थी।

डेंटल कॉलेज प्रबंधन द्वारा पीडियो डोंटिक्स, ओरल सर्जरी, प्रोस्थो डोंटिक्स, ओरल पैथोलॉजी, कंजर्वेटिवडेंटिस्ट्री में पिछले 8 वर्षों से पीजी सीट की मांगकी जा रही है। डीसीआई के निरीक्षण के बाद से कयास लगाया जा रहा है कि पिछले 8 वर्षों से पीजी सीट के लिए जारी कवायद पूरी की जा सकेगी।

ज्ञात हो कि प्रदेश के एकमात्र शासकीय डेंटल कॉलेज, रायपुर के 8 विभागों में से ओरल पैथोलॉजीमें प्रोफेसर और कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्रीमें रीडर की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है।

निरीक्षण के दौरान टीम के सदस्यों ने हॉस्पीटल में वर्तमानचिकित्सकीय सुविधाओं, ओपीडी, सभीविभागों के स्टाफ, पीजीक्लीनिक की जानकारी ली। निरीक्षण के पखवाड़े भर बाद डीसीआई ने दोबारा कमियों कीसूची कॉलेज प्रबंधन को प्रेषित की है। इसमें डीसीआई द्वारा कॉलेज केएक विभाग में प्रोफेसर और एक विभाग मेंलेक्चरर की कमी बताई थी। इसके पश्चात दंत चिकित्सा महाविद्यालय प्रबंधन और संचालनालय चिकित्सा शिक्षा नेडीसीआई को कम्प्लाइंस रिपोर्ट भेजी थी।

कॉलेज और डीएमई के इस रिपोर्ट से यदि डीसीआईसंतुष्ट होती है तो पिछले 8 वर्षोंसे जारी पीजी सीट की मांग पूरी हो सकती है। कॉलेज प्रबंधन के अनुसारजनवरी में पीजी नीट को देखते हुए दिसंबर तक डीसीआई सूची जारी कर सकती है। प्रबंधन का यह भी दावा है कि इस बार पीजी की सीट जरूर मिल सकेगी।

पांच वर्षों में निजी कॉलेजों को 110 सीटें

जानकारी के अनुसार पीडियो डोंटिक्स, ओरल सर्जरी, प्रोस्थो डोंटिक्स, ओरल पैथोलॉजी, कंजर्वेटिवडेंटिस्ट्री विभाग में पीजी पाठ्यक्रम के लिए कॉलेज प्रबंधन ने वर्ष 2009-10 मेंपहली बार आवेदन किया था। वहीं पिछले वर्ष 2016-17में 4 विभागों के लिए 2-2 सीट की मांग की गई थी। इसके पश्चात सीट मिलने का पुख्ता दावा कर रही डेंटल कॉलेज तैयारी भी कर ली थी।

साथ ही पीजीक्लीनिक का निर्माण करने तकरीबन सवा करोड़रुपए भी खर्च कर दिए थे, लेकिन निरीक्षण के बाद कॉलेज में खामियों को देखते हुए डीसीआई की टीम केंद्र को शासकीय डेंटल कॉलेज में सीटों के लिए अनुशंसा नहींकी। शासकीय कॉलेज में डीसीआई ने लगातार खामियां बताते हुए सीटों का आवंटन ही नहीं किया, जबकि इन पांच वर्षों में डीसीआईने प्रदेश के पांच प्राइवेट डेंटल कॉलेजों में 110 पीजी सीटों के लिए मान्यता दी है।

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