
स्पेशल-26 की तर्ज पर रेड मारता था डाकू सुल्ताना, एक घटना से बन गया सैनिक
रायपुर। आपने कई ऐसी फिल्में देखी होंगी जिसमें लूट का माल गरीबो में बांटकर अपने संगठन का संचालन किया जाता है। संस्कृति विभाग के मुक्ताकाश मंच पर ऐसा ही सीन नजर आया जिसका दर्शकों ने खूब आनंद उठाया। यहां गम्मत छत्तीसगढ़ महतारी फिरिया उर्फ डाकू सुलताना की प्रस्तुति हुई। डाकू सुल्तान हमेशा एसपी, कमांडो का भेष धारण कर बड़े ओहदेदारों के यहां रेड मारता है। इस कमाई को वह जरूरतमन्दों को बांटता है। संस्कृति विभाग के मुक्ताकाशी मंच में रंगमध्यदक्षिणी के पहले दिन गम्मत छत्तीसगढ़ महतारी कीरिया का मंचन हुआ। इसके बाद गोपाल सिंह ने सरोदवादन प्रस्तुत किया।
कहानी में ट्विस्ट
कहानी कुछ ऐसी है कि सैनिक शादी के कुछ दिन बाद लड़ाई में जाता है। वहां जीत हासिल होती है लेकिन बुरी तरह घायल हो जाता है। उसे परमवीर चक्र मिलता है। इधर, पत्नी को पति की खोज खबर नहीं होने के कारण शहीद मान बैठती है। वह दूसरे के प्रेम में फंसकर दूसरी शादी कर लेती है। वे तय करते हैं कि अगर सैनिक जिंदा भी लौटा तो मार डालेंगे। 20 साल बाद सैनिक स्वस्थ हो जाताPatrika Plus Head Raipur. Raipu है और लौटते वक्त स्टेशन में उसकी मुलाकात डाकू सुल्ताना से होती है। डाकू खुद को इंडियन जासूस बताकर सैनिक से भेद जान लेता है। कैश होना जानकर उसका पीछा करता है। इधर, सैनिक की वापसी पर पत्नी हैरत में पड़ जाती है। वह अपने दूसरे पति के साथ मिलकर सैनिक को मारने का प्लान बनाती है। लेकिन लूट की नीयत से आया डाकू इनकी प्लानिंग सुन लेता है और छत्तीसगढ़ महतारी की सौगंध खाकर सैनिक की जान बचाता है। सैनिक अहसान के बदले सारी दौलत डाकू को देना चाहता है पर डाकू इनकार कर देता है। तब सैनिक डाकू को आत्मसमर्पण करवाकर मुख्यधारा से जोड़ते हुए देश की रक्षा करने सेना में भर्ती करा देता है।
इन्होंने निभाई भूमिका
डोमार सिंह- सुल्ताना डाकू, लेखराम साहू, जोकर एंड मिलिट्री जवान, रामा राम नेताम- सैनिक की पत्नी, गैंदालाल हिरवानी- जोकर, इशरू दास- पेटी मास्टर, व्यास नारायण- बेंजो मास्टर, आसकुमार- शहनाई मास्टर, लूमन- तबला मास्टर, धरमदास- नाल मास्टर, सालिक राम- झुमका वादक, रामकुमार- जनाना रोल।
Published on:
30 Jan 2020, 12:34 AM IST
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