
विशेष वरुण यज्ञ (photo source- Patrika)
Chhattisgarh Rain: आसमान में बादल तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन बारिश का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। धान उत्पादक राज्य छत्तीसगढ़ में किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। खेत तैयार हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण धान की बुआई प्रभावित हो रही है। ऐसे समय में प्रदेश में अच्छी वर्षा, किसानों की समृद्धि और सुख-शांति की कामना के साथ रायपुर के कचना रोड स्थित सुरेश्वर महादेव पीठ में वैदिक परंपरा के अनुसार वरुण यज्ञ का आयोजन किया गया।
इस धार्मिक अनुष्ठान में भगवान वरुण और इंद्र देव का आह्वान कर समय पर अच्छी वर्षा की प्रार्थना की गई। श्रद्धालुओं ने कामना की कि प्रदेश के खेत फिर से हरियाली से भर जाएं और किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौट आए।
पीठ के संस्थापक डॉ. स्वामी राजेश्वरानंद के नेतृत्व में आयोजित यज्ञ की शुरुआत भगवान गणेश एवं नवग्रह पूजन से हुई। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान वरुण की विशेष आराधना की गई। यज्ञ में प्रकृति के संतुलन, समय पर वर्षा और प्रदेश की खुशहाली की कामना की गई। इस अवसर पर कायम सिंह भगत, हिमांशु महाराज, रामकृष्ण त्रिपाठी, हनुमान प्रसाद शर्मा, दानीराम साहू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और आहुति देकर वर्षा की प्रार्थना की।
डॉ. स्वामी राजेश्वरानंद ने कहा कि वर्षा केवल मौसम का हिस्सा नहीं, बल्कि किसानों के जीवन और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। यदि समय पर वर्षा नहीं होती तो खेती, जल स्रोत, पशुधन और आम जनजीवन सभी प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि इसी भावना से पूरे छत्तीसगढ़ में सुख, समृद्धि और समय पर वर्षा की कामना करते हुए वरुण यज्ञ का आयोजन किया गया है। प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसी वैदिक परंपराएं सदियों से समाज का हिस्सा रही हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान उत्पादक राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ के लिए जून का अंतिम सप्ताह और जुलाई का पहला पखवाड़ा खेती के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दौरान अधिकांश क्षेत्रों में धान की बुआई और रोपाई का काम तेज होता है। यदि इस अवधि में पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो बुआई का रकबा घट सकता है। इससे उत्पादन प्रभावित होने के साथ किसानों की लागत भी बढ़ सकती है। यही वजह है कि इस समय पूरे प्रदेश के किसान अच्छी बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार सामान्य से काफी धीमी रही। लगभग दस वर्षों बाद ऐसी स्थिति बनी है कि मानसून छत्तीसगढ़ में सामान्य तिथि की तुलना में करीब एक सप्ताह की देरी से पहुंचा। मानसून की धीमी प्रगति का असर प्रदेश के अधिकांश जिलों में देखने को मिला, जहां जून महीने में सामान्य से लगभग 35 से 40 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। कम बारिश के कारण कई इलाकों में खेत सूखे पड़े हैं और खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई है।
फिलहाल प्रदेश में बारिश को लेकर आस्था और वैज्ञानिक पूर्वानुमान दोनों समानांतर चल रहे हैं। एक ओर मौसम विभाग सक्रिय मानसूनी सिस्टम के मजबूत होने की संभावना जता रहा है, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से प्रकृति से कृपा की कामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश होती है तो किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है और बुआई का कार्य तेजी से पूरा हो सकेगा।
प्रदेशभर के किसानों की निगाहें अब आसमान पर टिकी हैं। हर किसी को उम्मीद है कि जुलाई की शुरुआत के साथ मेघ खुलकर बरसेंगे, सूखी धरती फिर हरियाली की चादर ओढ़ेगी, जलाशय भरेंगे और खेतों में एक बार फिर जीवन लौट आएगा। यही उम्मीद और यही प्रार्थना लेकर श्रद्धालुओं ने वरुण देव से प्रदेश पर कृपा बरसाने की विनती की।
Updated on:
01 Jul 2026 01:19 pm
Published on:
01 Jul 2026 01:16 pm
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