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रात 9.20 बजे तक छिपा बैठा था सांप, राजगढ़ में ‘मम्मी-पापा’ को रुला गया 5 साल का विराट

snake bite: बारिश के मौसम में सांप के काटने की घटनाएं अचानक से बढ़ जाती है। एक्सपर्ट का कहना है कि बारिश के मौसम में सावधान रहने की जरूरत है...
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snake bite: मासूम को सांप ने काट लिया (Photo Source - Patrika)

snake bite: मासूम को सांप ने काट लिया (Photo Source - Patrika)

snake bite in rajghar: मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के समीपस्थ गांव मांडाखेड़ा में घर के आंगन में खेल रहे एक पांच साल के मासूम को सांप ने काट लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। परिजन उसे बजाए अस्पताल ले जाने के तीन घंटे तक झाड़फूंक करते रहे। जब तक उसे अस्पताल ले जाया गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने बताया कि विराट पिता दिनेश पारदी (5) निवासी मांडाखेड़ा (राजगढ़) की मौत हो गई।

शाम करीब छह बजे उसे घर के आंगन में सांप ने हाथ की अंगुली में काट लिया। इसके बाद परिजन देव स्थान, झाड़ फूंक और अन्य अंधविश्वास के माध्यम में उलझे रहे। रात करीब 9.20 बजे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की है। सांप रात तक छिपा बैठा रहा।

बारिश में बढ़ जाती है सांप काटने की घटनाएं

बरसात के मौसम में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग सांप काटने के बाद झाड़फूंक, तंत्र-मंत्र, देव स्थान चले जाते हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है और मरीज की जान खतरे में पड़ सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सांप के काटने के मामलों में पहले एक से दो घंटे का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है।

चिकित्सकों के अनुसार सभी सांप जहरीले नहीं होते, लेकिन यह पहचानना आम व्यक्ति के लिए संभव नहीं है कि काटने वाला सांप विषैला था या नहीं। इसलिए हर सर्पदंश को गंभीर मानते हुए तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचना चाहिए, जहां आवश्यकता पड़ने पर एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन देकर उपचार किया जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि सांप के जहर का असर शरीर के तंत्रिका तंत्र, रक्त संचार और मांसपेशियों पर पड़ सकता है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर सांस लेने में दिक्कत, लकवा, आंतरिक रक्तस्राव और गंभीर स्थिति में मौत भी हो सकती है।

सर्पदंश की स्थिति में चिकित्सकों की सलाह

-मरीज को शांत रखें और घबराने न दें।
-काटे गए अंग को कम से कम हिलाएं।
-तुरंत अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें।
-घाव को काटने, चूसने या उस पर कोई रसायन लगाने से बचें।
-रस्सी या कपड़े से अंग को कसकर न बांधें।

जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

सर्पदंश के मामलों में झाड़फूंक का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। मरीज को जितनी जल्दी चिकित्सकीय उपचार मिलेगा, उसके बचने की संभावना उतनी अधिक होगी। एंटी स्नेक वेनम ही विषैले सांप के काटने का प्रभावी उपचार है। इसलिए सर्पदंश की स्थिति में अंधविश्वास से दूर रहें और तत्काल चिकित्सा सहायता लें। यही सतर्कता जीवन बचा सकती है। -डॉ. आनंद दांगी, शिशु रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल, राजगढ़