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Rajgarh News: न मैदान, न सुविधाएं… फिर भी ‘गोल्डन विलेज’ बना ये गांव, बेटियां भी जीत रहीं गोल्ड

Golden Village: कुछ साल पहले गांव में जिन खेलों के नाम तक किसी ने नहीं सुने थे, अब उन खेलों में गांव ही नहीं देश का नाम रोशन कर खिलाड़ी, बेटियां भी ला रहीं गोल्ड ।
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santosh yadav

golden village noonyaheri national international players, अभ्यास करते वक्त व मेडल के साथ संतोष यादव (Source-Patrika)

ब्यावरा से लक्ष्मीनारायण यादव की रिपोर्ट

Rajgarh Golden Village: कहते हैं कि प्रतिभा सुविधाओं की मोहताज नहीं होती…कुछ ऐसी ही कहानी है मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के एक छोटे से कस्बे नून्याहेड़ी की, जहां न खेल मैदान है और न किसी तरह की कोई खेल सुविधा। साथ ही कुछ वर्ष पहले तक सेलिंग और रोइंग जैसे खेलों को यहां कोई जानता तक नहीं था, लेकिन यही छोटा-सा कस्बा आज इन खेलों में आधा दर्जन से अधिक गोल्ड मेडलिस्ट दे चुका है। गांव से निकले कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा पदक जीते। अब गांव की बेटियां भी खेल में प्रतिभाएं दिखा रही है, साथ ही मेडल भी जीत रही है। इनमें सेलिंग खिलाड़ी गोविंद बैरागी का सफर सबसे उल्लेखनीय है। जिसे वर्ष-2018 में एकलव्य अवार्ड भी मिला है। अब बेटियां भी गोल्ड ला रही है। साथ ही ओलंपिक के सपने देख रही है।

2014 में एक खिलाड़ी ने बदली खेल की दिशा

एकलव्य अवार्ड प्राप्त सेलिंग के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी गोविंद बैरागी ने बताया कि वर्ष-2014 में जून-जुलाई के दौरान गांव के एक शिक्षक के बेटे सतीश यादव के साथ क्रिकेट खेलने भोपाल पहुंचे थे। लेकिन क्रिकेट की जगह चयन सेलिंग में हो गया। इसके बाद भोपाल में प्रशिक्षण शुरू किया। करीब तीन महीने बाद ही हैदराबाद में हुई नेशनल प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसके बाद 2015 से 2019 के बीच गोविंद ने 15 से अधिक नेशनल प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीते। इस दौरान सतीश यादव ने भी कई मेडल जीते। इसके साथ ही गोविंद ने एशियन चैंपियनशिप-2018 में सिल्वर मेडल और एशियन गेम्स में चौथा स्थान पाया। इसके अलावा वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीते। अब गोविंद आर्मी और सतीश नेवी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

अब बेटियां भी ला रही मेडल

दो खिलाड़ियों को खेलों में बेहतर करते देख अन्य युवाओं की रुचि बढ़ने लगी। सेलिंग और रोइंग में दूसरे खिलाड़ियों का सामने आना शुरू हुआ और अब एक दर्जन मैडलिस्ट खिलाड़ी है। अब बेटियां भी गांव और देश का नाम रोशन कर रही हैं। गांव की संतोष यादव ने गरीब परिवार से होने के बावजूद रोइंग में जाने का फैसला किया। अपनी प्रतिभा को निखारते हुए अब वो कई नेशनल गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। संतोष एशियन चैंपियनशिप में भी अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। अब ओलंपिक खेलने का सपना संजो रही हैं। साथ ही गांव के ही मुकेश यादव का एक बेटा और दो बेटियां अपने खेल के समुंदर में सपनों की छलांग लगा रहे हैं। इसके अलावा अब अन्य 14-15 साल के छात्रों का खेलों के प्रति रुझान बढ़ रहा है।

गांव से निकले ये प्रमुख चमकते सितारे

गोविंद बैरागी (एकलव्य अवार्ड), सतीश पिता रामबाबू यादव गोल्ड मेडलिस्ट, नमिता पिता मुकेश, अंशु पिता अशोक यादव नेशनल मेडलिस्ट, संतोष यादव पिता हेमराज यादव, रोइंग में कई नेशनल गोल्ड और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी, मनोज पिता हिंदू सिंह यादव, अजय यादव गोल्ड मेडलिस्ट, घनश्याम पिता मुकेश सेलिंग में मेडलिस्ट, मुकेश की दो बेटियां भी रोइंग में दिखा रहीं प्रतिभा, शुभम पिता भगवा सिंह। ये सभी नेशनल मेडल जीते चुके खिलाड़ी हैं।