
Rajasthan Crime News: राजसमंद जिले के एक थाना क्षेत्र में सामूहिक बलात्कार, घातक हथियारों से मारपीट, डकैती के मामले में छह आरोपियों को एससी-एसटी कोर्ट राजसमन्द की विशिष्ट न्यायाधीश अभिलाषा शर्मा ने आजीवन कारावास तथा प्रत्येक आरोपी पर 84 हजार रूपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।
विशिष्ट लोक अभियोजक राजकिशोर ब्रजवासी ने बताया कि 14 दिसंबर 2018 को परिवादी ने एक थाने में रिपोर्ट दी कि 13 दिसंबर 2018 को छह आरोपी परिवादी के मकान जबरन घुस गए। जिनके पास चाकू, लट्ठ और सरिए थे। शोर करने पर आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी। इस दौरान उन्होंने एक व्यक्ति की धोती फाड़कर लोगों को कमरे में ही बांध दिया और लट्ठ व सरियों से मारपीट की। यहां लोगों के हाथों में पहने गहने भी छीन लिए। मकान में शोर शराबा सुन एक पड़ोसी आया तो उससे भी आरोपियों ने मारपीट की और बांध दिया। परिवादी को भी हॉल में हाथ बांध बैठा लिया। यहां आरोपियों ने घर में सो रही महिला के मुंह और हाथ बांधे और बारी-बारी बलात्कार किया।
पुलिस ने मामले की जांच कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एससीएसटी न्यायालय राजसमंद में आरोप पत्र पेश किया। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आरोपी गणेश उर्फ खंडिया पुत्र रामा उर्फ रामलाल भादसोड़ा कॉलोनी चित्तौड़गढ़, गणेश पुत्र छगनलाल ओडवालिया खेमली डबोक उदयपुर, वदन उर्फ मदन पुत्र रामा उर्फ रामलाल भादसोड़ा कॉलोनी चित्तौड़गढ़, लोकेश उर्फ लोगर पुत्र नंदा साकरोदा प्रतापनगर उदयपुर, सुरेश पुत्र दल्ला एकलिंगपुरा प्रतापनगर उदयपुर एवं जगदीश उर्फ रणजीत पुत्र नारायण घासा उदयपुर को मामले में दोषी मानते हुए उन्हें आजीवन कारवास की सजा सुनाई। इसके अलावा प्रत्येक अभियुक्त पर 84 हजार रुपए का जुर्माना लगाया।
इस मामले में विशिष्ट लोक अभियोजक राजकिशोर ब्रजवासी ने 46 गवाह, 174 दस्तावेज तथा 17 आर्टिकल पेश किए। पुलिस ने आरोप पत्र के साथ आरोपियों के पूर्व का अपराधी रिकॉर्ड पेश किया। जिसमें दो आपराधिक प्रकरणों में सजा होना भी पाया गया। आरोपियों ने घटना को अंजाम देने के दौरान लोगों गहने छीने, घरों से कीमती सामान चुराया। इसे लेकर थाने में डकैती करने, हथियारों से मारपीट करने का आरोप लगाते हुए थाने में मामला दर्ज कराया गया था।
इस प्रकरण में न्यायालय ने अपनी टिप्पणी भी दी, जिसमें कहा कि आरोपियों के विरुद्ध पूर्व के आपराधिक प्रकरणों की संख्या एवं पूर्व में हुए सजा के तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए यह प्रकट होता है कि अभियुक्तगण आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं, जो बार-बार अपराध करने के आदी हैं। उनके विरुद्ध लंबित प्रकरणों से यह भी प्रकट होता है कि अभियुक्त गण में विधि का कोई भय नहीं है। ऐसी स्थिति में इनके साथ सजा में किसी प्रकार की नरमी बरती जाना न्याय के उद्देश्यों के विपरीत होगा।
Published on:
20 Jul 2024 04:23 pm
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