गांव के युवाओं को करते थे प्रेरित
नारायण बचपन से ही पढा़ई में होशियार थे। उनमें शुरुआत से ही सेना में जाने का जज्बा था। इसी कारण उनका नाम आदर्श राउमावि स्कूल बिनोल में बोर्ड पर अंकित है। नारायण गांव ही नहीं आसपास के युवाओं के लिए हीरो थे। जब भी गांव में आते तो सेना के बारे में जानकारी देते हुए देश सेवा के लिए प्रेरित करते रहते थे। 38 साल के शहीद नारायण की छोटी सी जिन्दगी वाकई में इतिहास में दर्ज हो गई। मां-बाप के बगैर बचपन से संघर्ष में बढ़े हुए नारायणलाल की युवाओं को दी इस सीख को आज हर शख्स बताते हुए नहीं थक रहा हैं। बिनोल गांव और इस इलाके में उनकी प्रेरणा ने देश सेवा के जज्बे को और मजबूत बनाया है। गांव के भैरूलाल सेन ने बताया कि नारायणलाल छुट्टियों में जब भी गांव आते थे, तो सबसे पहले परिवारजनों से मिलकर घर से बाहर निकल जाते थे। युवाओं से उनका खासा लगाव था। मित्रों को फोन करके बुलाते थे। एक जगह एकत्र होने पर कसरत, स्वास्थ्य, शिक्षा, देशभक्ति और देशसेवा के ईर्द-गिर्द अपनी चर्चा को बांध लेते थे। सुरक्षा बलों में जाने के लिए हरदम अपने को तैयार रखने के लिए वह हमेशा प्रेरित करते थे। विकास दवे बताते हैं कि युवाओं को जल्दी उठने व फौजी की तरह जिन्दगी जीने को कहा करते थे।