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पीएम की इस महती योजना में कर दिया बड़ा खेल

डिजिटल इंडिया की सत्यापन प्रणाली को ही नकारा
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रतलाम

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Sachin Trivedi

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Updated: 21 Oct 2018, 1:29 PM IST

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रतलाम. रतलाम शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा खेल कर दिया गया है। जिस प्रणाली को सबसे बेहतर बताया जा रहा है, उसकी अनदेखी कर जिम्मेदारों में लाखों रुपए फर्जी तौर पर अपात्र हितग्राहियों के खोतों में डाल दिए है। जब यह मामला जांच में आया तो पता चला कि जिया टैगिंग वाली नई जांच व सत्यापन प्रणाली का उपयोग ही नहीं किया गया। हालांकि मामले में पुलिस की एसआइटी जांच कर रही है, लेकिन बड़े और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर से पर्दा नहीं उठ पा रहा है, मामले में फिर से शिकायत की गई है।

प्रधानमंत्री आवास योजना में लाखों के घोटाले की एसआइटी जांच धीमी पड़ गई है। एसआइटी दस्तावेजों के परीक्षण में जुटी है, जबकि योजना की महत्वपूर्ण प्रक्रिया जियो टेङ्क्षगग की अनदेखी की जा रही है। इस प्रक्रिया के जरिए हर स्तर पर हितग्राहियों का सत्यापन करने से लेकर राशि आवंटन तक का खुलासा हो सकता है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक के नाम एक पत्र भी सौंपा है। वहीं, जांच अधिकारी कुछ स्पष्ट नहीं कर रहे है। नगर निगम और सेडमैप के जरिए अपनाई गई प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रक्रिया में 13 अपात्रों का चयन करने और लाखों की राशि की हेराफेरी के मामले में स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआइटी) बड़े अधिकारियों की भूमिका का खुलासा नहीं कर पाई है। जांच की धीमी गति और कई महत्वूर्ण तथ्यों को शामिल किए जाने की मांग को लेकर राजस्व कॉलोनी निवासी संतोष कुमावत ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है।

पांच अधिकारी करते जियो टेङ्क्षगग से सत्यापन

कुमावत ने बताया कि जियो टेगिंग की अनदेखी कर आवास योजना की राशि हितग्राहियों के खातों मेंं डाली गई है। इसकी जांच होना चाहिए, क्योंकि जियो टेगिंग से पांच स्तरों पर अधिकारी जुड़े होते है। जब प्रक्रिया तय है तो निगम के अधिकारियों ने इसकी अनदेखी क्यों की है। पीएम आवास योजना की प्रक्रिया में जियो टेङ्क्षगग को महत्वपूर्ण माना गया है। हितग्राही अपनी किस्त का उपयोग कर रहा है या नहीं तथा साइट के फोटो व सत्यापन, किस्त की राशि का सही उपयोग हुआ या नहीं आदि तथ्यों की जांच की जाती है। इसके लिए प्रक्रिया से संबंधित निकाय और एजेंसी के 5 अधिकारियों को जोड़ा गया है, यह सभी सूची का सत्यापन भी जिया टेगिंग के आधार पर करते है, लेकिन नगर निगम ने इन अधिकारियों की भूमिका की जांच की बजाय दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को जिम्मेदार ठहरा दिया है।

इस मामले से हुआ अनदेखी का खुलासा
एसपी को लिखे पत्र में बताया गया कि ईश्वर नगर से जिया टेगिंग की अनदेखी का मामला सामने आया है। हितग्राही लक्ष्मीबाई पति बसंत कुमार के खाते में बिना जिया टेगिंग के 5 किस्त डाली गई है। जबकि हितग्राही ने एक रुपया भी खर्च नहीं किया है। पहली किस्त 31 मार्च को 50 हजार, दूसरी और तीसरी किस्त 24 अप्रैल को 50-50 हजार, चौथी और पांचवीं किस्त 5 जून को 50-50 हजार रुपए भी बिना जिया टेगिंग के ही डाली गई है। इसी तरह एक और हितग्राही ज्योति शक्तावत के अपूर्ण कार्य पर भी किस्त जारी हुई है।