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#MahaShivratri नहीं चढ़ता इस शिव मंदिर में एक भी बूंद जल, देखें वीडियो

महाशिवरात्रि का महापर्व संसार एक मार्च को मनाएगा, लेकिन मध्यप्रदेश में नदी के किनारे एक शिव मंदिर ऐसा भी है, जहां शिवलिंग पर जल की एक भी बूंद नहीं चढ़ती है।

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maha shivtarti

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रतलाम. महाशिवरात्रि का महापर्व संसार एक मार्च को मनाएगा, इस दौरान हर भक्त अपनी आस्था के साथ बाबा महादेव व महादेवी को प्रसन्न करने का प्रयास करेगा, लेकिन मध्यप्रदेश में नदी के किनारे एक शिव मंदिर ऐसा भी है, जहां शिवलिंग पर जल की एक भी बूंद नहीं चढ़ती है।

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मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के आदिवासी अंचल राजापुरा माताजी में माही नदी किनारे करीब 1200 साल पूराना एक शिवमंदिर ऐसा भी है, जहां महादेव को नियमित रुप से जल नहीं चढ़ता है। जल नहीं चढऩे के पीछे भी एक खास कारण है। असल में यहां पर कुछ लोगों की लापरवाही के चलते महादेव के 1200 साल पूराने इस शिवलिंग की देखरेख नहीं हो रही है। ऐसे में महादेव सहित अन्य परमार कालीन मूर्तियां और शिव मंदिर पर कभी - कभार ही भूला भटका कोई भक्त आता है।

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मंदिर व मुर्तियां भगवान भरोसे

असल में यहां पर देख-रेख के अभाव में 1200 साल पूराना शिव मंदिर धूल खा रहा है। कागजी खानापूर्ति के बीच मंदिर और मूर्तियां दोनों ही भगवान महादेव के भरोसे हैं। बेशकीमती इन मूर्तियों को अब तक पुरातत्व विभाग संभाल नहीं पाया है। पुरातत्व विभाग के द्वारा मूर्तियों का संरक्षण नहीं करने के पीछे सबसे बड़ी वजह है कि मूर्तियां जहां रखी है, वहां तक जाने का रास्ता काफी कठीन है। ऐसे में मूर्तियों को सहेजने के लिए जरूरी यह है कोई शिव भक्त ही सामने आए। क्योंकि सरकार व रतलाम के जिला प्रशासन ने सेक्यूलर होते हुए महादेव मंदिर को भगवान के ही भरोसे छोड़ दिया है।

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कौन उठाएगा जिम्मेदारी

माही नदी किनारे जमीन से निकली मूर्तियों और मंदिर के संरक्षण को लेकर पुरातत्व विभाग के द्वारा जिला प्रशासन से पत्राचार भी किया गया है। इसमें पुरातत्व विभाग के द्वारा मूर्तियों के संरक्षण को लेकर स्थानीय स्तर पर किसी की जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है जिससे की मूर्तियां इधर-उधर ना हो। इसके अतिरिक्त रास्ता बनाने के लिए भी विभाग द्वारा लिखा गया है जिससे की मूर्तियों को सहेजा जा सके। हालांकि अब तक कलेक्टर ने इसके लिए कोई बड़ी पहल की हो, यह सामने नहीं आया है।

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मंदिर का होगा जीर्णोद्धार

पुरातत्व विभाग की माने तो नदी किनारे निकले शिव मंदिर का नए सिरे से जीर्णोद्धार किया जाएगा, जिससे कि मंदिर नए स्वरूप में फिर से सामने आ सके। मंदिर का स्वरूप निखारने के लिए भी मंदिर के जीर्णोद्धार की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिससे कि वह नए रूप में सामने आए और पर्यटन की दृष्टि से आकर्षण का केंद्र बने। यह सब कागजों में तो चल रहा है, लेकिन योजना धरातल पर शिव भक्तों के सामने कब साकार होगी, यह तय नहीं हो पाया है।

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प्रशासन को लिखा है पत्र

माही किनारे खुदाई के दौरान निकली मूर्तियों के संरक्षणको लेकर और मंदिर को सहेजने के लिए रतलाम जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। मुर्तियों की देखरेख के लिए स्थानीय स्तर पर किसी शिवभक्त की जिम्मेदारी तय करने की बात सही है जिससे कि वह इधर उधर ना हो सके।

डॉ. डीपी पांडे, पुरातत्व विभाग इंदौर

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