4 नवंबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

खुद रिटायर्ड होकर बच्चों को नौकरी नहीं लगवा सकेंगे रेलकर्मचारी

खुद रिटायर्ड होकर बच्चों को नौकरी नहीं लगवा सकेंगे रेलकर्मचारी
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रतलाम

•

image

harinath dwivedi

•

Updated: 28 Sep 2018, 5:37 PM IST

patrika

खुद रिटायर्ड होकर बच्चों को नौकरी नहीं लगवा सकेंगे रेलकर्मचारी

रेलवे में लार्जेस स्कीम बंद, अब नहीं मिलेगा लाभ, बुधवार को जारी किए रेलवे बोर्ड ने आदेश, देशभर में विरोध शुरू

रतलाम। रेल कर्मचारियों के सेवानिवृति व उनके स्थान पर परिवार के एक सदस्य को रेलवे में नौकरी देने वाली लार्जेस स्कीम को बुधवार को रेलवे ने देशभर में बंद कर दिया है। रेलवे बोर्ड के ज्वाइंट डायरेक्टर एनपी सिंह ने इस मामले में आदेश जारी कर दिए है। आदेश जारी होते ही देशभर में इसका विरोध शुरू हो गया है।

रेल पटरियों की जांच करके रेल परिचालन को सुरक्षित बनाने वाले कर्मचारी अब ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर अपने बच्चों को नौकरी नहीं दिला सकेंगे। रेलवे बोर्ड ने बुधवार को इससे संबंधित योजना को बंद करने का निर्देश जारी कर दिया है। वहीं, रेलवे कर्मचारी यूनियनों ने इसका विरोध किया है। इस फैसले को चुनौती देने के लिए उन्होंने फिर से सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला किया है।

अधिकार का उल्लघंन बताया

रेलवे पटरियों की निगरानी करने वाले ट्रैक मैन, की मैन, गैंगमैन, पेट्रोल मैन आदि को अब लार्जेस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इस योजना के तहत रेलवे में कार्यरत वर्ग डी (संरक्षा से जुड़े) कर्मचारी 50 से 55 साल की उम्र में ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर अपने पुत्र या पुत्री को नौकरी दिला सकते थे। उन्हें अनुकंपा के आधार पर सीधी नियुक्ति मिल जाती थी। इस योजना के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में शिकायत की गई थी। हाई कोर्ट ने 2016 में रेलवे की इस योजना को कानून के समक्ष समता और सरकारी नौकरी में समान अवसर के अधिकार का उल्लघंन बताया था।

आदेश को बरकरार रखा

बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। शीर्ष अदालत के आदेश को ध्यान में रखते हुए रेलवे बोर्ड ने इस योजना को बंद करने का फैसला कर लिया है। रेलवे बोर्ड की ओर से सभी जोनल रेलवे को बुधवार को जारी पत्र के अनुसार 27 अक्टूबर, 2017 के बाद से इस आदेश को लागू माना जाएगा।

कर्मचारियों के लिए बुरी खबर

बोर्ड के इस फैसले का वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाईज यूनियन ने विरोध किया है। यूनियन इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में फिर से चुनौती देगी।

- प्रकाश व्यास, प्रवक्ता, वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाईज यूनियन


अब टीटीई व टीटी को भी सीयूजी सीम

रतलाम। पश्चिम रेलवे की विभिन्न ट्रेन में चलने वाली यात्री ट्रेन के टीटी च टीटीई के पास भी अब रेलवे द्वारा दिया गया सीयूजी सीम रहेगी। इसके लिए आदेश जारी हो गए है। इसी माह सभी टीटीई व टीटी को सीयूजी सीम जारी कर दी जाएगी। इससे बड़ा लाभ हो ये होगा की समय रहते यात्रियों को मदद मिलेगी व अपराध पर नियंत्रण होगा।

इस तरह समझे क्या आती समस्या
इस समय पश्चिम रेलवे के मुंबई, राजकोट, अहमदाबाद, भावनगर, नीमच, मंदसौर, इंदौर, रतलाम व महू से अनेक यात्री ट्रेन चलती है। यात्रा के दौरान अनेक एेसे पड़ाव आते है, जहां पर निजी मोबाइल सीम में नेटवर्क नहीं आता है। एेसे में जरुरत होने पर तब तक टीटी व टीटीई यात्री की मदद नहीं कर पाते है, जब तक मोबाइल में नेटवर्क नहीं आए। उदाहरण के लिए दाहोद से मेघनगर के बीच में कम से कम ११ स्थान एेसे है, जहां पर विभिन्न कंपनी के मोबाइल के टॉवर काम नहीं करते है। एेसे में सीयूजी के अभाव में रेलवे के टीटीई व टीटी जिन कंपनियों के मोबाइन सीम का उपयोग करते है, उनसे चाहते हुए भी मदद नहीं कर पाते है।

इस तरह होगा लाभ
रेलवे में जिस कंपनी की सीयूजी सीम का उपयोग होता है, उसका नेटवर्क को रेलवे बेहतर मानती है। एेसे में यात्री को मेडिकल की मदद, अपराध नियंत्रण में मदद, चोरी या अन्य कोई अपराध होने की दशा में समय रहते टीटी व टीटीई रेलवे नियंत्रण कक्ष को सूचना दे पाएंगे। एेसे में यात्री को समय पर मदद मिल पाएगी। इसके अलावा ट्रेन में होने वाली जहरखुरानी सहित अन्य अपराध के बारे में भी टीटीई व टीटी समय पर सूचना दे पाएंगे।

मंडल में ४०० से अधिक
रेल मंडल में ४०० से कुछ अधिक टीटी व टीटीई रतलाम, चित्तौडग़ढ़, उज्जैन, इंदौर व महू में पदस्थ है। इन सभी को इसी माह सीयूजी सीम देने के आदेश मंडल से जारी हो गए है। रतलाम में तो इसका वितरण अगले सप्ताह से शुरू भी हो जाएगा।

- जेके जयंत, जनसंपर्क अधिकारी, रतलाम रेल मंडल