
कृषि उपज मंडी में प्याज की अत्यधिक आवक से प्रतापनगर ब्रीज से लेकर दूसरी तरफ सालाखेड़ी चौराहे तक वाहनों की लगी कतार, आवागमन के दौरान आमजन वाहन चालक परेशान होते रहे। पुलिस जवानों ने यातायात दुरस्त किया।
रतलाम। महू-नीमच रोड स्थित कृषि उपज मंडी में प्याज की भारी आवक के कारण मार्ग पर जाम लग गया। मंडी से प्रताप नगर ब्रीज और सालाखेड़ी चौराहे तक सैकड़ों की संख्या में प्याज से भरी ट्रॉलियां सडक़ किनारे रेंगती हुई दिखाई दीं, जिससे परिसर में पहुंचने में विलंब हुआ।
कृषि उपज मंडी समिति की ओर से किसानों को सूचना जारी की गई है कि 19 अगस्त तक प्याज की आवक दो दिन के लिए पर्याप्त मात्रा में आ चुकी है। आगामी अवकाश को देखते हुए किसानों से अनुरोध किया गया है कि वे नीलामी के लिए प्याज लेकर न आएं और होने वाली असुविधा से बचें।
मंडी में 1 हजार से अधिक ट्राली
इस दौरान मुख्य मार्ग पर लगे जाम से आमजन को डेढ़ से दो घंटे तक आवागमन में बाधा हुई। सूचना मिलने पर पुलिस जवानों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली, जिसके बाद शाम साढ़े पांच बजे तक स्थिति सामान्य हो सकी। मंडी परिसर में उस समय तक 1000 प्याज की ट्रॉलियां पहुंच चुकी थीं।
ऊंचे में 3961 रुपए किलो तक नीलाम प्याज
बुधवार को लहसुन-प्याज मंडी में 22098 क्विंटल प्याज नीलाम हुए, जिनके भाव 1025 रुपए से 3961 रुपए प्रति क्विंटल तक रहे। औसत मूल्य 2812 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। इसी तरह, 693 क्विंटल लहसुन का भी विक्रय हुआ, जिसके भाव 1680 रुपए से 17000 रुपए प्रति क्विंटल तक रहे। मंडी प्रभारी सचिव राजेंद्र व्यास ने बताया कि दिन भर में कुल 45 हजार कट्टे प्याज के नीलाम किए गए। मंडी के बाहर खड़ी प्याज की 1 हजार ट्रॉलियों को शाम साढ़े पांच बजे तक अंदर ले लिया गया था, जबकि आवक जारी है।
किसानों से आवक नहीं लाने का आग्रह
कृषि उपज मंडी समिति की ओर से किसानों को सूचना जारी की गई है कि 19 अगस्त तक प्याज की आवक दो दिन के लिए पर्याप्त मात्रा में आ चुकी है। आगामी अवकाश को देखते हुए किसानों से अनुरोध किया गया है कि वे नीलामी के लिए प्याज लेकर न आएं और होने वाली असुविधा से बचें। समिति ने सूचित किया है कि 22 अगस्त को चौथा शनिवार और 23 अगस्त को शासकीय अवकाश रविवार होने के कारण मुख्य अनाज मंडी, लहसुन-प्याज एवं उपमंडी नामली प्रांगण का अवकाश रहेगा।
प्याज की आवक और बाजार पर असर
प्याज की अत्यधिक आवक अक्सर किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए चुनौती बनती है। अत्यधिक उत्पादन से जहां किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता, वहीं भंडारण और परिवहन की समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। रतलाम जैसी प्रमुख मंडियों में आवक बढऩे से स्थानीय बाजार और परिवहन व्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है, जिससे आमजन को असुविधा होती है।
Updated on:
19 Aug 2026 10:19 pm
Published on:
19 Aug 2026 09:57 pm
