
रतलाम. रेलवे ने नई दिल्ली से मुंबई सेंट्रल तक के करीब 1500 किमी लंबे रेलवे ट्रैक पर 160 किमी की गति से ट्रेन को चलाने की तैयारी रेलवे ने तेज कर दी है। इसके लिए मंडल में 160 की गति से चलने वाली ट्रेन के ट्रैक की जांच के लिए पश्चिम रेलवे की पहली रक्षण रेल की सुविधा मिल गई है। इसकी कई विशेषताएं है। रेलवे जीएम आलोक कंसल ने इसकी शुरुआत बुधवार को की। करेंगे है।
जीएम कंसल ने मीडिया को बताया कि कोरोना काल मे जो कर्मचारी नही रहे उनके परिवार को अनुकम्पा नियुक्ति दी जा रही है। 187 ट्रेन प्रतिदिन रतलाम से निकल रही है। यात्रियों की संख्या फिलहाल कम है। रेलवे के आला अधिकारियों के अनुसार पश्चिम रेलवे में सबसे पहले रतलाम मंडल को यह रक्षण रेल की सौगात मिली है।
इस रेल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमे दोनों तरफ इंजन की सुविधा है व निरीक्षण के समय मोडऩे की जरुरत नहीं रहती है। इतना ही नहीं, जब मंडल रेल प्रबंधक अपने सेलून से निरीक्षण करते है तो उसमे अधिकारियों के बैठने की सुविधा कम है या सीट कम है। इसके बजाए इस रक्षण यान में अधिकारियों के केबीन के अलावा एक बार में 22 अधिकारी कर्मचारी के बैठने के लिए चेयर लगी हुई है। इतना ही नहीं, इसमे 360 तक की गति से निरीक्षण जरुरत होने पर किया जा सकता है।
कई सुविधाएं है इस यान में
विशेष रेल रक्षण यान या ट्रेन अपने आप में कई सुविधाएं लिए हुए है। पूरी तरह से एसी इस रक्षण रेल में दोनों तरफ इंजन की सुविधा है। इससे लाभ यह होगा की निरीक्षण के दौरान एक बार में ही दोनों तरफ देखा जा सकेगा। इसके अलावा आधुनिक कम्प्यूटर प्रणाली से यह लैस है जिससे ट्रैक के नीचे की कमी इससे पता चल जाएगी। अब तक यह कार्य आरडीएसओ की ट्रेन में ही है। रेल मंडल को रेलवे ने यह रक्षण रेल इसलिए दी है जिससे 160 किमी की गति से चलने वाली ट्रेन की योजना को गति दी जा सकें। इससे रेल मंडल में नागदा से गोधरा तक के सेक्शन में इस कार्य को तेज गति से करने में मदद मिलेगी। मंगलवार को रेलवे ने इस रेल रक्षण यान या रेल का रतलाम से फतेहाबाद रतलाम तक ट्रायल किया है।
कई तरह से लाभ होगा
पश्चिम रेलवे महाप्रबंधक आलोक कंसल ने बताया कि पश्चिम रेलवे में इस तरह का रक्षणयान पहली बार रतलाम को मिला है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि निरीक्षण के दौरान इसमे दोनों तरफ ग्लास विंडो है। जब सेलून से निरीक्षण करते थे तब इंजन की जरुरत रहती थी, इसमे इंजन की जरुरत नहीं रहेगी व व यह आईएसएफ चैन्नई से बनकर आई है। इससे कई तरह के लाभ होंगे।
Published on:
11 Aug 2021 03:03 pm
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