
सुख-समृद्धि के कारक ग्रह 'गुरु' को चमकाने के लिए सुनहरे रंग का ये रत्न करें धारण, बनेगा हर काम
Pukhraj Ke Fayde: ज्योतिष शास्त्र अनुसार हमारे जीवन में ग्रहों का विशेष प्रभाव पड़ता है। अगर कुंडली के ग्रह अनुकूल हैं तो व्यक्ति तमाम सुखों का भोग करता है वहीं ग्रहों के कमजोर होने पर व्यक्ति का जीवन परेशानियों से भर जाता है। हर ग्रह किसी न किसी चीज का कारक माना जाता है। गुरु ग्रह की बात करें तो इसे सबसे शुभ ग्रह का दर्जा प्राप्त है। ये सुख-समृद्धि, खुशहाली, सफलता और वैवाहिक जीवन का कारक होता है। कुंडली में इस ग्रह की मजबूत स्थिति ही ये निश्चित करती है कि व्यक्ति जीवन में कितना सफल होगा। इस ग्रह का रत्न पुखराज माना जाता है। जानिए इस रत्न को कौन धारण कर सकता है।
किन राशियों के लोग धारण कर सकते हैं पुखराज? हर कोई पुखराज रत्न धारण नहीं कर सकता। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि कोई भी रत्न धारण करने से पहले किसी रत्न विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लें। वैसे ज्योतिष की मानें तो पुखराज रत्न कर्क, वृश्चिक, मेष, मीन और धनु राशि के जातक धारण कर सकते हैं। इस राशियों के जातकों के लिए ये रत्न अनुकूल माना जाता है। इसे धारण करने से आपकी जीवन में खुशहाली आती है। इसके अलावा जिन जातकों की कुंडली में गुरु ग्रह उच्च के हों उन्हें पुखराज धारण करने से खूब लाभ मिलता है।
इन राशियों के लिए पुखराज रत्न नहीं माना जाता शुभ: कुछ ऐसी भी राशियां हैं जिनके लिए ये रत्न शुभ नहीं माना जाता है। ये राशियां हैं वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ। ज्योतिष अनुसार इन राशियों के लोगों को पुखराज धारण करने से पहले अच्छे से सोच विचार कर लेना चाहिए।
पुखराज धारण करने के फायदे: इस रत्न को धारण करने से गुरु ग्रह को मजबूती मिलती है। जिससे व्यक्ति की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है। यदि विवाह में रुकावटे आ रही हैं तो इस रत्न को धारण करने की सलाह दी जाती है। इसे धारण करने से स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है। कमजोर पाचन को मजबूती मिलती है। इसके अलावा आध्यात्मिक वा धार्मिक विषयों में रुचि रखने वालों के लिए भी पुखराज रत्न फायदेमंद माना जाता है।
पुखराज पहनने के नियम व विधि: इस रत्न को अष्टधातु या सोने की धातु में पहनना चाहिए। पुखराज कम से कम सात कैरेट का होना चाहिए। इसे बृहस्पतिवार के दिन और पुष्य नक्षत्र में धारण करना शुभ माना जाता है। पुखराज रत्न को धारण करने से पहले इसे पंचामृत यानी गंगाजल, घी, दूध, शहद, शक्कर में स्नान करा लेना चाहिए। फिर हल्दी व पीले पुष्प अर्पित कर 'ऊं ब्रह्म ब्र्हस्पतये नमः' मंत्र को 108 बार बोलते हुए बृहस्पतिदेव का ध्यान करते हुए पुखराज की अंगूठी को तर्जनी उंगली में धारण कर लेना चाहिए।
यह भी पढ़ें: बुध का सिंह राशि में गोचर जल्द, 4 राशियों का होगा भाग्योदय, धन से जुड़े मामलों में मिलेगी अपार सफलता
Published on:
25 Jul 2022, 10:04 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.