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Sade Sati: इनको अपेक्षा से ज्यादा मान सम्मान और वैभव दिलाती है साढ़े साती, क्या आप भी हैं ऐसे लकी

आम तौर पर शनि साढ़े साती (Sade Sati) को अशुभ प्रभाव के लिए जाना जाता है। लेकिन ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि शनि की साढ़े साती सभी के लिए कष्टकारी नहीं होती है। कुछ ऐसी स्थितियां होती हैं, जिसके कारण जातक को शनि साढ़े साती लाभ (Shubh Shani Sade Sati) पहुंचाती है। शनि की महादशा के दौरान कुछ लोगों को अपेक्षा से ज्यादा लाभ, मान सम्मान और वैभव प्राप्त होता है। आइये जानते हैं...
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Pravin Pandey

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Updated: 7 Apr 2023, 2:32 PM IST

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shubh shani

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनि केवल कष्ट ही नहीं देते, यह दंडाधिकारी हैं और कर्म के अनुसार फल प्रदान करने वाले हैं। ये शुभ फल और लाभ भी प्रदान करने वाले हैं तो जान लीजिए वे परिस्थितियां जिनमें शनि अपेक्षा से ज्यादा मान सम्मान और वैभव प्रदान करते हैं।

1. चंद्रमा उच्च राशि का होः शनि की साढ़े साती के समय यदि चंद्रमा उच्च राशि का हो तो उस समय जातक की सहन शक्ति बढ़ जाती है। इसके प्रभाव से कार्य क्षमता में भी वृद्धि हो जाती है। इसका परिणाम भी शुभ होता है, जबकि चंद्रमा के कमजोर या नीच का रहने से व्यक्ति की सहनशीलता कम हो जाती है और उसका काम में मन नहीं लगता, इसके परिणामस्वरूप उसकी समस्या बढ़ जाती है।


2. ये लग्न रहेः ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार लग्न वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ रहने पर शनि जातक को कष्ट नहीं देते बल्कि उनको सहयोग ही देते हैं। इससे इन लग्न वालों को लाभ होता है।

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3. लग्न कुंडली और चंद्र कुंडली में शुभ होः शनि यदि लग्न कुंडली और चंद्र कुंडली दोनों में शुभ है तो ऐसे जातकों के लिए कष्टकारी नहीं होते। हालांकि कुंडली में स्थिति इसके विपरीत रहे तो जातकों को शनि की साढ़े साती के समय काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों के सामने एक के बाद एक कठिनाई आती है।


4. ऐसे होता है मिलाजुला प्रभावः चंद्र कुंडली और लग्न कुंडली में एक में शनि शुभ और दूसरे में अशुभ रहे तो शनि की साढ़े साती के समय जातक को मिलाजुला प्रभाव देखने को मिलता है।

साढ़े सात साल की होती है शनि की साढ़े सातीः ज्योतिष के अनुसार शनि की साढ़े साती की अवधि साढ़े सात साल की होती है। इसके बाद फिर स्थितियों में बदलाव हो जाता है।