1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

तरुण सागर ने 12 की उम्र में ही त्याग दिया था घर, बोलकर निकले थे यह बड़ी बात

गृहस्थ जीवन की बहन से पत्रिका की खास बात
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

सागर

•

image

Samved Jain

•

Updated: 31 Aug 2018, 2:17 PM IST

A4kR

तरुण सागर ने 12 की उम्र में ही त्याग दिया था घर, बोलकर निकले थे यह बड़ी बात

दमोह. कड़वे प्रवचन और क्रांतिकारी संत के नाम से विख्यात मुनि तरुणसागर की सल्लेखना की खबर सुनते ही पूरा देश स्तब्ध हो गया है। हर कोई अचानक आई इस खबर पर विश्वास नहीं कर पा रहा है। अभी कुछ दिन पहले तक ही मुनिश्री के उपदेशों को सुनकर लौटे भक्त हैरान परेशान है। मुनिश्री ने उनको दिए जा रहे प्राथमिक उपचार पर विराम लगाते हुए सल्लेखना का निर्णय लिया है।

यहां सुनें बहन माया से बाचतीत के कुछ अंश

मुनि तरुण सागर की सल्लेखना शुरू होने की जानकारी लगते ही उनके गृहस्थ जीवन के रिश्तेदार और भक्तों का दिल्ली पहुंचना शुरू हो गया है। दमोह जिले के गुंहची गांव में उनका घर है। जहां से अधिकांश परिजन दिल्ली पहुंच चुके है। इसके अलावा तेंदूखेड़ा में उनके गृहस्थ जीवन की बड़ी बहन माया जैन रहती है। जिनके घर से भी परिजन दिल्ली पहुंच चुके है। माया जैन से पत्रिका प्रतिनिधि ने चर्चा की। इस दौरान उन्होंने बताया कि वह चार भाई और तीन बहनें है। जिनमें से एक तरुणसागर भी है।

पत्रिका से बातचीत के दौरान माया जैन ने बताया कि तरुणसागर बचपन से ही धार्मिक रहे है। शरारत के साथ-साथ धर्म में उनका लगाव रहा है। वह भगवान बनना चाहते थे। यही कारण था कि १२ वर्ष की उम्र में ही उन्होंने घर का त्याग कर आचार्यों के साथ रहने लगे थे। आचार्य विद्यासागर से ब्रह्मचर्य की दीक्षा लेने के बाद वह वापस पीछे नहीं मुड़े और २० साल की उम्र में ही वह मुनि तरुणसागर बन गए। उन्हें आचार्य पुष्पदंग सागर ने मुनि दीक्षा दी। इसके बाद वह जो है सभी के सामने है। तब से वह हमारे नहीं जनसंत बन चुके थे। मुनि तरुणसागर की सल्लेखना की खबर अचानक सुनकर पूरा परिवार स्तब्ध है।

बहन माया जैन के अनुसार तरुण सागर घर से यह कहते हुए निकले थे कि वह भगवान बनना चाहते है, वह महावीर बनना चाहते है। आज समाधि भावना के साथ ही उनकी यह बात भी सच हो रही है। समाधि मरण की मोक्ष का रास्ता है। जो हर किसी को नहीं मिलता। भगवान महावीर के आदर्शों पर चलते हुए मुनि तरुणसागर ने समाज को नई दिशा दिखाने का कार्य है जो युगो-युगो तक याद किया जाएगा।