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Sagar liquor tragedy: ‘अब कभी नहीं लौटेगा…’, एक साथ उठीं 2 सगे भाइयों, बुआ-भतीजे की अर्थी, मातम में डूबा पूरा गांव

Sagar liquor tragedy: जिले में अवैध जहरीली शराब से कई परिवार तबाह हो गए। गूगरा गांव में दो सगे भाइयों उजियार सिंह और भगवान सिंह की एक-एक दिन के अंतराल पर मौत हो गई।
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सागर

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Astha Awasthi

Sep 08, 2026

एक साथ 4 परिवारों के 2-2 सदस्यों की मौत, अंतिम संस्कार (Photo Source - Patrika)

एक साथ 4 परिवारों के 2-2 सदस्यों की मौत, अंतिम संस्कार (Photo Source - Patrika)

Sagar liquor tragedy:मध्यप्रदेश में सागर जिले के बंडा क्षेत्र में अवैध रूप से बिकने वाली जहरीली शराब ने कई घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझा दिए हैं। यह ऐसी त्रासदी है जिसने सिर्फ लोगों की जान नहीं ली बल्कि मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया और परिवार का सहारा भी छीन लिया। इस घटना में एक साथ चार परिवारों के दो-दो सदस्यों की जिंदगी लील ली है। मौत के इस तांडव ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और हर तरफ मातम पसरा हुआ है। इस त्रासदी ने परिवारों को झकझोर कर रख दिया है, क्योंकि मरने वालों में पिता-पुत्र, सगे भाई, बुआ-भतीजा और मामा-भांजा शामिल हैं। इस हृदयविदारक घटना ने प्रशासन और समाज के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं।

सगे भाइयों की एक साथ उठी अर्थी

गूगरा गांव में दो सगे भाइयों की मौत से ऐसा मातम छाया है कि देखने वालों का कलेजा कांप जाए। भगवान सिंह लोधी पुत्र विजय सिंह 35 वर्ष की सोमवार को मौत हो गई, जबकि उनके बड़े भाई उजियार सिंह पुत्र विजय सिंह की ठीक एक दिन पहले यानी रविवार को ही मौत हो चुकी थी। मृतक उजियार सिंह के बेटे करतार सिंह ने दर्दभरे आंसुओं के साथ बताया कि घर में पिता की मौत के कारण पहले से ही मातम और अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों की व्यस्तता थी। इसी बीच चाचा भगवान सिंह की भी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने उन्हें तुरंत बंडा अस्पताल में भर्ती कराया, जहां ग्लूकोज की बोतल भी लगाई गई, लेकिन उन्हें घबराहट होने लगी। कुछ देर बाद वे खुद ही घर वापस लौट आए और घर के पास ही चबूतरे पर लेट गए। जब लोगों ने उनकी गंभीर हालत देखी, तो उन्हें सीधे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।

रक्षाबंधन पर इंदौर से आया था भगवान, अब कभी नहीं लौटेगा

भतीजे करतार ने बताया कि वह अपनी मां और चाचा भगवान सिंह के साथ इंदौर में मजदूरी करते थे। रक्षाबंधन के चलते चाचा 26 अगस्त को ही इंदौर से अपने गांव लौटे थे, किसे पता था कि यह उनकी आखिरी घर वापसी है। उनके पीछे एक दो साल का मासूम बालक है, जिनके सिर से साया उठ गया है। वहीं करतार ने बताया कि उसके बड़े भैया बेगलूरू में काम करते है पिता की मौत की सूचना देने के दूसरे दिन भी वह गांव नहीं पहुंच पाए थे।

छापरी गांव का दर्दनाक मंजर, बुआ-भतीजे की एक साथ मौत

छापरी गांव की श्याम बाई उम्र करीब 60 साल की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई, और ठीक उसी दौरान उनके भतीजे कैलाश अहिरवार 40 वर्ष, निवासी छापरी की भी जान चली गई। दोनों रिश्ते में बुआ और भतीजे लगते थे। श्याम बाई के बेटे विठ्ठल अहिरवार ने रुंधे गले से बताया कि पापा की मौत के बाद से ही उनकी मां अंदर से टूट चुकी थीं और लगातार शराब पीने लगी थीं। परिवार ने उन्हें कई बार रोका-समझाया, लेकिन वे नहीं मानीं। घटना के दिन घर के सभी लोग मजदूरी करने बाहर गए हुए थे और गांव में आसानी से मिल रही शराब को पी लेने के कारण अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। सीने में तेज दर्द उठा और पलभर में उनकी सांसें थम गई। एक ही परिवार के दो सदस्यों के इस तरह असमय चले जाने से कोहराम मचा हुआ है।

मामा-भांजे की हालत बिगड़ी, अस्पताल में दोनों ने तोड़ा दम

पाटन गांव से भी मामला सामने आया है। रामसिंह लोधी पुत्र गजराज सिंह लोधी, निवासी पाटन, 40 वर्ष को गंभीर हालत में रविवार रात 10 बजे बंडा से बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज लाया गया था। इलाज के दौरान रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे उनकी भी मौत हो गई। मृतक के भाई सुरेंद्र लोधी ने रोते हुए बताया कि इस दुखद घटना से ठीक पहले, उनके भांजे रोशन सिंह लोधी की भी जहरीली शराब पीने के कारण मौत हो चुकी थी। मामा और भांजे की इस तरह कुछ ही घंटों के अंतराल में हुई मौत ने दोनों परिवारों को झकझोर कर रख दिया है।

बमूरा गांव में उजड़ा परिवार, पिता के बाद बेटे की टूटी सांसें

बमूरा मेड़ा गांव में मौत का ऐसा साया मंडराया कि पूरा परिवार ही बिखर गया। यहां जहरीली शराब ने एक ही घर के पिता और पुत्र दोनों की जान ले ली। परिवार के मुखिया गोविंद लोधी 62 वर्ष की रविवार को जहरीली शराब पीने के कारण अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी। पिता की अर्थी उठने से पहले ही घर के जवान बेटे रामप्रसाद लोधी की हालत भी गंभीर हो गई। परिजनों ने तुरंत आनन-फानन में भर्ती कराया, सागर बीएमसी से उसे एयरलिफ्ट कराकर बेहतर इलाज के लिए भोपाल रेफर करवाया, लेकिन मौत के मुंह में जा चुके बेटे को बचाया नहीं जा सका। इलाज के दौरान रामप्रसाद ने भी दम तोड़ दिया।