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गजब: उत्‍तर प्रदेश के लाखों लेखपालों को मिलते हैं साइकिल भत्‍ते के रूप में 100 रुपये

उत्‍तर प्रदेश में अपनी मांगों को लेकर लेखपालों ने किया था आंदोलन

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गजब: उत्‍तर प्रदेश के लाखों लेखपालों को मिलते हैं साइकिल भत्‍ते के रूप में 100 रुपये

शिवमणि त्‍यागी, सहारनपुर। आज के हाईटेक युग में जब सारे काम करने के लिए बाइक या कार का इस्‍तेमाल होता है। ऐसे में अगर सरकारी कर्मचारियों को साइकिल भत्‍ता मिल रहा हो तो आपको यह मजाक लगेगा लेकिन यह सच है। यह भत्‍ता भी माह का मात्र 100 रुपये का है, जब महंगाई अासमान छू रही है। ऐसा भी नहीं ये कर्मचारी ग्रुप डी के या आंशिक हों। हम बात कर रहे हैं लाखों लेखपालों की।

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सरकारी योजनाओं का भी होता है जिम्‍मा

एक लेखपाल के पास पांच गांव होते हैं। उनके जिम्‍मे गांव-गांव जाकर जमीन मालिकों का सत्यापन करने के अलावा कई काम होते हैं। उनके पास कई सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का भी काम होता है। इसके लिए अगर ये साइकिल से जाएंगे तो हो लिया कार्य पूरा। इन्‍हीें लेखपालों से सरकार आैर जनता सभी रिकाॅर्ड अपडेट रखने आैर प्रत्येक मामले में माैके पर जाकर निरीक्षण करने की उम्‍मी रखती है। साथ ही प्रत्येक मंगल दिवस आैर थाना दिवस में समय से पहुंचने काे भी कहा जाता है।

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साइकिल के रखरखाव के मिलते हैं रुपये

उन्‍हीं सी ग्रेड कर्मचारियों को आज भी किराए भत्ते के रूप में महज 100 रुपये साइकिल के रखरखाव के लिए मिलते हैं। इतना ही नहीं स्‍टेशनरी के नाम पर भी लेखपाल काे एक माह में महज 100 रुपये ही मिलते हैं। जबकि उन्‍हें कई योजनाओं व पेपरों की रोजाना फोटोकॉपी करानी पड़ती है।

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2006 में बढ़े थे 50 रुपये

सहारनपुर लेखपाल संघ के अध्यक्ष रामकिशन के मुताबिक लेखपालाें के किराए भत्ते में वर्ष 2006 में 50 रुपये की वृद्धि हुई थी। इससे पहले उन्हें किराया भत्ता साइकिल रखरखाव के खर्च के रूप में महज 50 रुपये मिलता था। छठा वेतनमान लगने के बाद इस रकम काे बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया। वहीं, इससे पहले स्टेशनरी के नाम पर महज 15 रुपये ही मिलते थे, जाे अब बढ़ाकर 100 रुपये कर दिए गए हैं।

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क्या कहते हैं लेखपाल

सहारनपुर लेखपाल संघ के जिला मंत्री राजेश कश्यप आैर मंडल मीडिया प्रभारी उत्तम त्यागी के मुताबिक, जितना उन्हें मासिक भत्ता मिलता है, उससे कई गुना रकम एक दिन के काम में ही खर्च हाे जाती है। इसी तरह से जितना उन्हें महीने का स्टेशनरी भत्ता मिलता है, उतने के कागज एक ही दिन में खर्च हाे जाते हैं। इनका यह भी कहना है कि सरकार लेखपालाें से अन्य विभागाें के काम भी कराती है।

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कहने को डिजिटल पर कंप्‍यूटर तक नहीं

वर्ष 2014 में जब सबकुछ अॉनलाइन कर दिया गया। उस समय टैबलेट दिए जाने की बात कही थी लेकिन आज तक टैबलेट नहीं मिल पाए हैं। उनका कहना है क‍ि शाम को भी कई बार अधिकारी का फोन आ जाता है कार्य पूरा करने के लिए। ऐसे में उन्‍हें साइबर कैफे का सहारा लेना पड़ता है। साइबर कैफे बंद हों तो फिर अध्‍ािकारियों की डांट सुनो।

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IMAGE CREDIT: patrika

वेतन भी है कम

रामकिशन का कहना है क‍ि लेखपालाें से सरकार अन्य कार्य भी कराती है। उनकाे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियाें के बराबर ही वेतन दिया जाता है। लेखपालाें का ग्रेड पे 2000 रुपये है जबकि चतुर्थश्रेणी कर्मचारी का ग्रेड 1800 रुपये है। यानि दाेनाें में महज 200 रुपये का अंतर। लेखपाल संघ 2800 रुपये ग्रेड पे की मांग कर रहा है। इसको लेकर ही उन्‍होंने आंदोलन चलाया था।

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मजबूरन करना पड़ा आंदोलन

लेखपालाें का कहना है कि उनकी मांग सरकार गंभीरता से नहीं ले रही थी, इसलिए उन्हें मजबूरन आंदाेलन करना पड़ा। 3 जुलाई से 17 जुलाई तक पूरे प्रदेश में लेखपालाें की हड़ताल रही। इस दाैरान लेखपालाें पर कार्रवाई भी हुई। अकेले सहारनपुर में 30 से अधिक लेखपालाें पर इस हड़ताल की गाज गिरी।

ये काम करते हैं लेखपाल

- सभी खसरा खतौनी का रिकॉर्ड अपडेट रखना
- गांव-गांव जाकर भू स्वामियों का सत्यापन
- तहसील दिवस और समाधान दिवस में जाना
- विभागीय जांचों के अलावा अन्य जांच भी करना
- जनगणना और कृषि गणना के अलावा अन्य गणनाएं करना

- इनके अलावा सरकारी योजनाएं देखना