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गजब- उत्‍तर प्रदेश के इस गांव में नशा और मांसाहार तो दूर लोग प्‍याज व लहसुन तक नहीं खाते- देखें वीडियो

देवबंद से आठ किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में कोई भी शराब, पान, बीड़ी, सिगरेट, सिगार, हुक्का, गुटखा, गांजा, अफीम या भांग आदि का सेवन नहीं करता है

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सहारनपुर। शायद ही आपने पहले कभी ऐसे गांव के बारे में सुनो हो, जहां के लोग बीड़ी, सिगरेट, शराब, लहसुन और प्याज से दूर रहते हों। जी हां, अपने देश में भी ऐसा गांव है, जिसका नाम मिरगपुर है। यह उत्‍तर प्रदेश के देवबंद से आठ किलोमीटर दूर देवबंद-मंगलौर रोड पर काली नदी के तट पर बसा है।

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90 फीसदी संख्‍या हिंदू गुर्जरों की

मिरगपुर गांव की आबादी करीब 12 हजार है। यह गांव देश में पूर्ण मद्य निषेध एवं सात्विक खानपान की अनूठी पहचान रखता है। गांव की 90 फीसदी जनसंख्या हिंदू गुर्जरों की है। गांव के गुर्जर नेता और पूर्व ब्लाॅक प्रमुख चौधरी प्रविन्द्र का कहना है कि यहां कोई भी शराब, पान, बीड़ी, सिगरेट, सिगार, हुक्का, गुटखा, गांजा, अफीम या भांग आदि मादक पदार्थों का सेवन नहीं करता है। इतना ही गांव के लोग मीट, प्याज या लहसुन का भी सेवन नहीं करते हैं।

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जहांगीर के शासनकाल में ही पड़ी परंपरा

गांव वालों के मुताबिक, मुगल सम्राट जहांगीर के शासनकाल में ही उस समय इस अनूठी परंपरा की नींव पड़ी थी, जब बाबा फकीरा दास यहां आकर रुके थे। बताया जाता है कि आज से करीब 500 वर्ष पहले बाबा ने अपने शिष्यों के सामने यह शर्त रखी थी कि वे कभी धूम्रपान और मांसाहार का सेवन नहीं करेंगे। बाबा फकीरा दास की समाधि काली नदी के तट के पास ऊंचे टीले पर स्थित है। वहां हर वर्ष फाल्गुन कृष्ण पक्ष की दशमी को मेला लगता है।

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आसपास के राज्‍यों से भी आते हैं लोग मेले में

महाशिवरात्रि से ठीक पहले लगने वाले इस मेले में राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड व हरियाणा आदि से भी श्रद्धालु आते हैं और बाबा फकीरा की समाधि पर मत्‍थ टेककर उनका आशीर्वाद लेते हैं। इस दिन गांव में दीपावली जैसा माहौल होता है और हर घर में देसी घी का हलवा, पेड़े और पूरी-कचौड़ी का प्रसाद तैयार होता है।

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पंजाब के संगरूर से आए थे बाबा फकीरा दास

पूर्व ब्लाॅक प्रमुख चौधरी प्रविन्द्र के अनुसार, जहांगीर के शासनकाल में गांव और आसपास के लोग जब मुसलमान आततायियों के अत्याचारों से त्रस्त थे, तब पंजाब के संगरूर जिले के घरांची गांव से देश भ्रमण पर निकले बाबा फकीरा दास मिरगपुर पहुंचे थे। उस समय गांव में गुर्जर बिरादरी के बाबा मोल्हड सिंह का ए‍क ही परिवार रहता था। उन्होंने ही बाबा फकीरा दास को अपने यहां ठहराया था। बाबा फकीरा दास ने उस समय कहा था कि यदि गांववासी नशे और तामसिक व्यंजनों का पूरी तरह से परित्याग करते हैं तो यह गांव और उसके लोग सदैव खुशहाल रहेंगे।

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निर्मल गांव का मिल चुका है दर्जा

गांव के पूर्व प्रधान चौधरी श्रषिपाल बताते हैं कि जो गांव की परंपरा का उल्लंघन करता है, उसे गुरू जी स्वयं ही दंड देते हैं। कई लोगों की अस्वाभाविक मृत्यु को गांववासी इसी रूप में देखते हैं। वर्ष 2010 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने गांव मिरगपुर को निर्मल गांव के सम्मान स्वरूप तत्कालीन गांव प्रधान चौधरी कर्णपाल सिंह को सम्मानित किया था।

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राजेश पायलट का इस गांव से था लगाव

गांव के पूर्व प्रधान चौ. ऋषिपाल और मौजूदा प्रधान शिवकुमार के मुताबिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट का इस गांव से बहुत लगाव था। उन्होंने गांव की काली नदी पर पुल बनवाकर लोगों को बड़ी राहत दी थी। पायलट की स्मृति में गांव में प्रवेश द्वार पर उनकी प्रतिमा लगाई गई है। यहां रहने वाले भाजपा नेता चौ़. विरेद्र सिंह कहते हैं कि गांव में कोई भी व्यक्ति दूध व घी नहीं बेचता है। पूरे गांव की एकजुटता भी अपने आप में एक मिसाल है।