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#Bitiyaatwork: शोरूम पर पहुंचकर बेटी बोली ‘पापा ने कड़ी मेहनत से खड़ा किया शोरूम मैं भी बनूंगी बिजनेस वूमेन’

सहारनपुर के ज्वैलर्स अजय शंकर सिंघल ने वर्ल्ड डॉटर्स-डे पर ‘पत्रिका’ के अभियान की प्रशंसा करते हुए अपनी बेटी शिवानी को अपने शोरूम में बुलाया और उसे अपने बिजनेस की बारीकियां समझाईं।
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सहारनपुर

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Rahul Chauhan

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Updated: 23 Sep 2018, 6:49 PM IST

bitiya at work

#Bitiyaatwork: शोरूम पर पहुंचकर बेटी बोली 'पापा ने कड़ी मेहनत से खड़ा किया शोरूम मैं भी बनूंगी बिजनेस वूमेन'

सहारनपुर. बेटियां किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं। बस बेटियों पर भरोसा करके देखिये। बेटियां कई क्षेत्रों में बेटों से भी बेहतर करने की क्षमता रखती हैं, सिर्फ क्षमता ही नहीं रखतीं, बल्कि उन्होंने यह कर भी दिखाया है। रविवार को वर्ल्ड डॉटर्स-डे पर ‘पत्रिका’ की ओर से बेटियों के हौसले को परवान चढ़ाने के लिए एक अभिनव अभियान की शुरुआत की गई है। इसके तहत 30 सितंबर तक बेटियां अपने माता-पिता के कार्यस्थल पर जाकर उनकी कार्य प्रणाली को समझेंगी।

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सहारनपुर के ज्वैलर्स अजय शंकर सिंघल ने वर्ल्ड डॉटर्स-डे पर ‘पत्रिका’ के अभियान की प्रशंसा करते हुए अपनी बेटी शिवानी को अपने शोरूम में बुलाया और उसे अपने बिजनेस की बारीकियां समझाईं। दिल्ली के एक इंस्टीट्यूट से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रही शिवानी भी अपने बिजनेस के बारे में जानकर काफी खुश नजर आई। इस दौरान अजय ने एक दिन के लिए अपना शोरूम बेटी को सौंप दिया और आने वाले सभी ग्राहकों को बेटी ने ही रिसीव किया। अजय शंकर सिंघल के मुताबिक इस दौरान उन्होंने देखा कि बेटी शोरूम पर आने वाले ग्राहकों को उनसे भी अच्छे ढंग से संतुष्ट करती हैं और ग्राहकों के साथ शिवानी का व्यवहार भी उनसे बेहतर रहता है।

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अजय बताते हैं कि उन्हें तो कई बार ग्राहक की डिमांड पर गुस्सा भी आ जाता है और कई बार वह ग्राहक की डिमांड को समझ ही नहीं पाते। इतना अनुभव होने के बाद भी वह कई बार ग्राहक को संतुष्ट करने में खुद को असमर्थ महसूस करते हैं, लेकिन बेटी ने जितने अच्छे ढंग से ग्राहकों को संतुष्ट किया। यह खुद उनके लिए एक सुखद अनुभव रहा। अजय बताते हैं कि उन्होंने सोचा भी नहीं था कि बेटियां इतना अच्छा कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं और यह कहने में उन्हें कोई अतिशयोक्ति नहीं लगती कि आज बेटियां बेटों से भी बेहतर करने की क्षमता रखती हैं।