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स्वाद और सेहद का खजाना गार्लिक

नेशनल गार्लिक डे स्पेशल: घर से लेकर रेस्टोरेंट तक में किया जाता है इस्तेमाल  

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सतना

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Jyoti Gupta

Apr 18, 2019

National Garlic Day Special ...

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सतना. किचन में बनने वाली सिंपल दाल हो या फिर रेस्टारेंट में बनने वाली ग्रेवी वेजीटेबल, ख्पिकनिक के दौरान तैयार किया जाने वाला सबका फेवरेट डिश चोखा इसमें जब तक गार्लिक का तड़का न लगाया जाए तो स्वाद कुछ फीका-फीेका सा रहता है। यही वजह है कि शहर के अधिकतर घरों में गार्लिक जरूर मिल जाएगी। जिला अस्पताल के डाइटिशियन डॉ. जीएस तिवारी का कहना है कि यह केवल खाने में इस्‍तेमाल होने वाला एक पदार्थ नहीं है, बल्कि यह एक गुणकारी दवा भी है। उससे जुकाम, फ्लू, रक्तचाप, कैंसर से बचाव के गुण पाए जाते हैं। सर्दियों के दिनों में गार्लिक जरूर इस्तेमाल की जाती है। क्योंकि इसकी तासीर गर्म होने के कारण यह ठंड को दूर करने का कुदरती उपाय है। शहर के डॉक्टर सर्दियों में गार्लिक के सेवन करने को कहते हैं। शहर के कुछ लोग तो सर्दियों के मौसम में एंटीबायोटिक्स पाने के लिए गाजर, अदरक और लहसुन का जूस बनाकर पीते हैं। जिन घरों में छोटे बच्चे होते हैं उन घरों के बड़े बुजुर्ग बच्चों को दूध में गार्लिक उबालकर पिलाने की बात कहते हैं जिससे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सके।

औषधीय गुणों से भरपूर

गार्लिक सिर्फ खाने में स्‍वाद ही नही बढ़ाता बल्कि आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी बहुत अच्‍छा है। इसमें प्रोटीन, खनिज, लवण और फ ॉस्फ ोरस, आयरन व विटामिन ए, बी व सी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है। साथ ही गार्लिक में अलिसिन नामक एंटीबॉयटिक भी पाया जाता है जो बहुत से रोगों को होने से बचाता है।

अच्छी सेहत का राज

अच्छी सेहद और कई तरह के रोगों की रोकथाम में गार्लिक की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। लहसुन में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते है जिसमें प्रोटीन 6.3 प्रतिशत, वसा 0.1 प्रतिशत, कार्बोज 21 प्रतिशत, खनिज पदार्थ एक प्रतिशत, चूना 0.3 प्रतिशत, लोहा 1.3 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम होता है।

काटकर खाने से अधिक फायदे

अगर गार्लिक को महीन काटकर बनाया जाये तो उसके खाने से अधिक लाभ मिलता है। रोज नियमित रूप से गार्लिक की पांच कलियां खाई जाएं तो हृदय संबंधी रोग होने की संभावना में कमी आती है। गार्लिक सेलेनियम का भी अच्छा स्रोत होता है। गर्भवती महिलाओं को गार्लिक का सेवन नियमित तौर पर करना चाहिए। लहसुन स्किन के लिए भी फ ायदेमंद माना जाता है।
इन बीमारियों के लिए बेहद फायदेमंद

कैंसर को रोकें

गार्लिक का नियमित सेवन करने से कैंसर होने का खतरा काफ ी कम रहता है। एनल्स आफ इंटरनल मेडिसिन की रिपोर्ट के अनुसार, हर हफ्ते पांच कली गार्लिक खाने से कैंसर का खतरा 30 से 40 फ ीसदी कम हो जाता है। गार्लिक का एक गुण यह भी है कि यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफ ा करता है।

दिल के लिए अत्‍यंत लाभकारी

उच्‍च रक्‍तचाप को दूर करने में भी गार्लिक काफ ी फ ायदेमंद होता है। इसमें मौजूद एलिसिन नामक तत्‍व उच्‍च रक्तचाप को सामान्‍य करने में मदद करते हैं। उच्‍च रक्तचाप के मरीज अगर नियमित रूप से लहसुन का सेवन करते हैं तो इससे उनका रक्तचाप नार्मल रहता है। जर्नल आफ न्यूट्रीशन के अनुसार, रोजाना लहसुन के सेवन से कोलेस्ट्राल में 10 फ ीसदी की गिरावट आती है, जिससे हृदय रोगों की संभावना कम हो जाती है।

दांत दर्द से राहत

गार्लिक में एंटी बैक्‍टीरियल तत्‍व होते हैं जो दांत पर सीधा प्रभाव डालते हैं। गार्लिक दांतों के दर्द से भी राहत दिलाने का काम करता है। गार्लिक को लौंग के साथ पीसकर दांतों के दर्द वाले हिस्से पर लगाने से दर्द से तुरंत राहत मिलती है।

डायबिटीज में फ ायदेमंद

गार्लिक डायबिटीज रोगियों के लिए भी फ ायदेमंद होता है। यह शरीर में शुगर के स्‍तर को नियंत्रित कर इन्‍सुलिन की मात्रा को बढ़ा देता है जिससे डायबटीज की बीमारी में राहत मिलती है।

रक्‍त संचार करें दुरुस्‍त

गार्लिक उन लोगों लिए भी बहुत फ ायदेमंद होता है जिनका खून गाढ़ा होता है। यह शरीर में रक्‍त प्रवाह सुचारू बनाए रखता है। खून का पतला करता है जिससे आप कई संभावित रोगों से बचे रहते हैं।

गर्भावस्था में बेहत्तर

गर्भावस्था के दौरान गार्लिक का नियमित सेवन मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए बेहद फ ायदेमंद होता है। गर्भवती महिलाओं को गार्लिक का सेवन नियमित तौर पर करना चाहिए। यह गर्भ के भीतर शिशु के वजन को बढ़ाने में सहायक होता है।

एलर्जी दूर करें

गार्लिक में मौजूद एंटी इंफ्लामेटरी तत्‍व एलर्जी को दूर करने में मदद करता है। अगर गार्लिक का नियमित रूप से सेवन किया जाए तो शरीर में एलर्जी से होने वाले निशान और चकतों की समस्‍या भी दूर हो जाती है।

पैरों की झनझनाहट ठीक करें

रोजाना एक गार्लिक खाने से पैरों की झनझनाहट ठीक हो जाती है। रिपोर्ट के अनुसार लहसुन में मौजुद प्रोटीन, वसा, कार्बोज, खनिज पदार्थ नसों की झनझनाहट की समस्या को ठीक कर देती हैं।

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